80 हजार पौधे कहां लगे, कितने बचे? एनजीटी ने मांगा पूरा हिसाब

भोपाल: शहर और आसपास के क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई के बदले किए जाने वाले क्षतिपूर्ति पौधारोपण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण की मंगलवार को भोपाल पीठ ने सख्त रुख अपनाया है. नितिन सक्सेना बनाम एनएचएआई व अन्य मामले की हुई सुनवाई में अधिकरण ने वन विभाग और भोपाल नगर निगम से पौधारोपण पर खर्च राशि और पौधों की वास्तविक स्थिति का पूरा हिसाब मांगा है. पीठ ने पूछा कि वर्ष 2025 में पौधरोपण के लिए राशि जमा होने के बावजूद वर्ष 2026 के मानसून में इसका उपयोग क्यों नहीं किया गया. प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख को पिछले पांच वर्षों में एनएचएआई तथा अन्य सरकारी और निजी एजेंसियों से मिली राशि का जिला-वार विवरण देने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही हर वर्ष लगाए गए पौधों की संख्या और खर्च का अलग-अलग ब्योरा मांगा गया है.
-80 हजार पौधों की होगी जमीनी जांच
सीईसी की अनुशंसा के अनुसार हुजूर तहसील में 70 हजार और शहर की सडक़ों व डिवाइडरों पर 10 हजार पौधे लगाए जाने थे. एनजीटी ने इन पौधों की स्थलवार और जियो-टैग्ड तस्वीरों के साथ रिपोर्ट मांगी है. अधिकरण ने कहा कि केवल कागज पर पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है. सूख चुके पौधों की जगह नए पौधे लगाने और उनके बड़े होने तक पानी व रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
-विभागों को तय समय में देना होगा जवाब
भोपाल नगर निगम को अगली सुनवाई से पहले जवाब देने का अंतिम अवसर दिया गया है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 10 कार्यदिवस और वन विभाग को चार सप्ताह में रिपोर्ट पेश करनी होगी. मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को होगी.
-एनजीटी के प्रमुख निर्देश
5 साल में मिले पौधरोपण फंड का जिला-वार हिसाब.
80 हजार पौधों की स्थलवार फोटो रिपोर्ट.
सूखे पौधों का तत्काल प्रतिस्थापन.
पौधों के जीवित रहने और रखरखाव की निगरानी.
फंड और पौधरोपण में अंतर की विस्तृत रिपोर्ट.

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