सिंगरौली : मोरवा के पुनर्वास और विस्थापन से जुड़े मुद्दों को लेकर बनी आंदोलन की रणनीति का असर अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। आंदोलन में जिन मांगों को लेकर सहमति बनी थी, उन पर प्रक्रिया तेज किए जाने के संकेत मिल रहे हैं।इसी क्रम में एनसीएल ने 30 सितंबर को चटका-झिंगुरदह में बस स्टैंड निर्माण के लिए निविदा जारी कर दी। खास बात यह है कि यह टेंडर आंदोलन के दिन जारी हुआ। एनसीएल द्वारा जारी निविदा में चटका झिंगुरदह में बस स्टैंड निर्माण का अनुमानित खर्च करीब 7 करोड़ 25 लाख 83 हजार 850 रुपये निर्धारित किया गया है।
जिसे एक वर्ष में पूरा करना होगा। वहीं निविदा दस्तावेज में बस स्टैंड से संबंधित सिविल, इलेक्ट्रिकल, पानी एवं सैनिटरी कार्यों के लिए विस्तृत तकनीकी प्रावधान किए गए हैं। निर्माण में गुणवत्तापूर्ण भवन कार्य के साथ फर्श, स्टील स्ट्रक्चर एवं रेलिंग, दरवाजे-खिड़कियां, सैनिटरी सुविधाएं, पानी की सप्लाई और ड्रेनेज से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल हैं। बस स्टैंड निर्माण में विद्युत संबंधी कार्य भी निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार किए जाने हैं। इधर मोरवा पुनर्वास से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक शासकीय भूमि पर बसे परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास का लाभ देने का है।
आंदोलन के दौरान इस मांग को प्रमुखता से उठाया गया था। सहमति के बाद अब इस मामले में 15 अक्टूबर तक निर्णय आने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय लोगों की नजर अब इस फैसले पर टिकी है। यदि शासकीय भूमि पर बसे परिवारों के पक्ष में निर्णय होता है तो इसे मोरवा पुनर्वास को लेकर हुए आंदोलन के बाद बनी सहमति के क्रियान्वयन की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जाएगा।
