मोतीलाल ओसवालएमएफ ने ‘मोतीलाल ओसवाल निफ्टी रीट्सऔर रियल्टी इंडेक्स फंड'(Motilal Oswal Nifty RIETs& Realty Index Fund)शुरू किया

एनएफओ 25 सितंबर, 2026 को खुलकर 9 अक्टूबर, 2026 को बंद होगा

यह नियमों पर आधारित एक इंडेक्स फंड है जो भारत के लिस्टेड रियल एस्टेट इकोसिस्टम — यानी रीट्सऔर रियल्टी कंपनियों — में निवेश का मौका देता है।

मुंबई,  मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड (एमओएमएफ) ने अपनानया फंड ऑफर, “मोतीलाल ओसवाल निफ्टी रीट्सऔर रियल्टी इंडेक्स फंड”(Motilal Oswal Nifty RIETs& Realty Index Fund)शुरू  करने की घोषणा की है। यह एक ओपन-एंडेड योजना है जो ट्रैकिंग एरर के अधीन रहते हुए निफ्टीरीट्सऔर रियल्टी टोटल रिटर्न इंडेक्स (टीआरआई) का अनुसरण करती है और भारत की सूचीबद्ध रीट्सऔर रियल एस्टेट कंपनियों में निवेश का मौका देती है। पारंपरिक रूप से, रियल एस्टेट में निवेश का तरीका प्रॉपर्टी का सीधे मालिकाना हकहासिल करना रहा है — जो निवेश का एक ऐसा तरीका है जिसमें पैसा आसानी से नहीं निकाला जा सकता (illiquid) और जिसके लिए आमतौर पर शुरुआत में ही बड़ी रकम का निवेश करनाहोता है। वहीं, रीट्स (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्टों) ने धीरे-धीरे आय देने वाले रियल एस्टेट क्षेत्र को सूचीबद्धकिया और आसानी से व्यापार किए जा सकने वालेरूप में उपलब्ध कराया है। इस क्षेत्र में, रियल्टी स्टॉक्स डेवलपर्स का प्रतिनिधित्व करते हैं औरसूचीबद्ध रियल एस्टेट निवेशकों को निवेश का एक अतिरिक्त जरिया प्रदान करते हैं। मोतीलाल ओसवाल निफ्टी रीट्सऔर रियल्टी इंडेक्स फंड (Motilal Oswal Nifty RIETs& Realty Index Fund) एक पारदर्शी, इंडेक्स-आधारित तरीके से लिस्टेड रीट्सऔर रियल्टी कंपनियों में निवेश का मौका देता है।

यह इंडेक्स एनएसई पर सूचीबद्धरीट्सऔर रियल एस्टेट(RIETs and Real Estate) क्षेत्र के योग्य स्टॉक्स पर आधारित है। इसमें फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के आधार पर स्टॉक्स का मूल्यांकन किया जाता है, और रीट्सका मूल्यांकन इंडेक्स में कम से कम 60% होता है। अलग-अलग स्टॉक्स का मूल्यांकन ज़्यादा से ज़्यादा 15% और स्पॉन्सर-ग्रुप का वेटेज ज़्यादा से ज़्यादा 32% हो सकता है, और इसमें कुल 15 कंपोनेंट्स शामिल होते हैं। इंडेक्स की समीक्षा और पुनर्मूल्यांकन हर तिमाही में इंडेक्स की कार्यप्रणाली के अनुसार किए जाते हैं। रीट्सऔर रियल एस्टेट स्टॉक्स एक ही रियल एस्टेट चक्र के दो अलग-अलग हिस्से हैं। रीट्स—यानी भूमिपतियों  — के पास पूरी हो चुकीं और आय देने वाली बिल्डिंग्स होती हैं और उन्हें अपनेकुल वितरणीय नकदी प्रवाह का कम से कम 90% हिस्सा इकाई धारकों को बांटना होता है। रियल एस्टेट कंपनियाँ — यानी “बिल्डर्स” — परियोजनाओं को विकसित करने और बेचने का काम करती हैं, और उन्हें परियोजना की शुरुआत, बुकिंग और कब्ज़ा हस्तांतरण के समय एकमुश्त मुनाफ़ा मिलता है। एक ही इंडेक्स में इन दोनों को शामिल करके, यह फंड एक नियम-आधारित इंडेक्स दृष्टिकोण के ज़रिए सूचीबद्धरीट्सऔर रियल एस्टेट कंपनियों में निवेश का मौका देता है। “पांच भूमिपति, दस बिल्डर्स, एक बास्केट” — यह 31 अगस्त 2026 तक के इंडेक्स के मौजूदा कंपोजीशन को दिखाता है, जिसमें 5 रीट्सऔर रियल एस्टेट सेक्टर के 10 स्टॉक्स शामिल हैं।

मोतीलाल ओसवाल एएमसी (Motilal Oswal AMC research)की शोध के अनुसार,निफ्टी रीट्सएंड रियल्टी टीआरआई(Nifty REITs & Realty TRI) ने 5 साल में लगभग 17.29% का सीएजीआरदिया है, जबकि निफ्टी 50 टीआरआई का सीएजीआरलगभग 8.32% रहा है; इसकी वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) मोटे तौर पर बड़े मार्केट के बराबर ही रही है। भारत का सूचीबद्ध रियल एस्टेट क्षेत्र अभी शुरुआती दौर में है — वर्तमान में सीएजीआरके लिए योग्य ग्रेड – एऑफिस स्टॉक का केवल 32% हिस्सा ही सूचीबद्ध है — इससे पता चलता है कि जैसे-जैसे समय के साथ और रियल एस्टेट एसेट्स सूचीबद्ध होंगे, इसमें बढ़त की गुंजाइशें बढ़ती जाएंगी।

फंड का मुख्य विवरण:

एनएफओ अवधि : सितंबर 25, 2026 से ऑक्टोबर 9, 2026

निवेश उद्देश्य: इस स्कीम का उद्देश्य निवेश पर ऐसी वापसी देना है जो ट्रैकिंग एरर को ध्यान में रखते हुए, ‘निफ्टी रीट्सऔर रियल्टी टोटल रिटर्न इंडेक्स’ के प्रदर्शन से मिलने वाली कुल वापसी के करीब हों। हालांकि, इस बात की कोई गारंटी या भरोसा नहीं है कि स्कीम का निवेश उद्देश्य पूरा हो।

बेंचमार्क: ‘निफ्टी रीट्सऔर रियल्टी टोटल रिटर्न इंडेक्स’

उत्पाद की उपयुक्तता: यह उत्पाद उन निवेशकों के लिए उपयुक्त है जो लंबे समय में पूंजी वृद्धि और ‘निफ्टी रीट्सऔर रियल्टी टोटल रिटर्न इंडेक्स’ के प्रदर्शन के अनुसार निवेश पर वापसी चाहते हैं (यह ट्रैकिंग एरर के अधीन है)।

न्यूनतम निवेश:

एनएफओ के दौरान और चालित आधार पर:

एकमुश्त: ₹500 और उसके बाद ₹1 के गुणांकों में

एकाधिक एसआईपी आवृत्ति उपलब्ध हैं – अधिक जानकारी के लिए एसआईडी पढ़ें

निर्गमन भार:

1% – अगर आवंटन के 15 दिन या उससे पहले भुनाया जाता है। शून्य – अगर आवंटन के 15 दिन बाद भुनाया जाता है। एमओएमएफकी योजनाओं के बीच बदली करने पर निर्गमन भार लागू होगा।

योजना के अंदरूनी विकल्पों के बीच बदली करने पर कोई भार नहीं लगेगा। साथ ही, यह स्पष्ट किया जाता है कि एक ही योजना के प्लान के बीच बदली करने पर कोई निर्गमन भार नहीं लगेगा। भार संरचना के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया इस नोट में भार संरचना वाला भाग देखें।

भारत का सूचीबद्ध रीट्सबाज़ार, भले ही एशिया और दुनिया के दूसरे बाज़ारों के मुकाबले नया है, लेकिन इसने दुनिया भर में लगभग 5.7% का तीसरा सबसे ज़्यादा औसत रिटर्न दिया है। छह सूचीबद्ध रीट्सका कुल बाज़ार मूल्य ₹2.1 लाख करोड़ से ज़्यादा है और 2019 से इन्होंने इकाई धारकों को ₹34,800 करोड़ से ज़्यादा बांटे हैं। एमओएएमसी का मानना ​​है कि यह क्षेत्र निवेशकों को पारंपरिक इक्विटी और डेट होल्डिंग्स के साथ-साथ एक तरलीकृत और आयलक्षी विकल्प प्रदान करता है।

मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के बिज़नेस हेड – पैसिव फंड्स, प्रतीक ओसवाल ने कहा, “रियल एस्टेट हमेशा से भारतीय निवेशकों के पोर्टफोलियो का हिस्सा रहा है, लेकिन यह सीधे प्रॉपर्टी के हक पर आधारित होता है — जिसमें पैसा आसानी से नहीं निकलता (illiquid), ज़्यादा पूंजी लगती है और अलग-अलग तरह के निवेश (diversify) करना मुश्किल होता है। मोतीलाल ओसवाल निफ्टी रीट्सऔर रियल्टी इंडेक्स फंड (Motilal Oswal Nifty RIETs& Realty Index Fund) भारत की सूचीबद्ध रीट्सऔर रियल एस्टेट कंपनियों को एक नियम-आधारित बास्केट में लाता है। इससे निवेशकों को इस थीम में शामिल होने का एक पारदर्शी और आसानी से नकद प्राप्त कराने वाला (liquid) तरीका मिलता है, और उन्हें अलग-अलग स्टॉक चुनने या बाज़ार चक्र का सही समय देखने की ज़रूरत नहीं पड़ती।”

इस फंड को स्वप्निल मयेकर (फंड मैनेजर – इक्विटी हिस्से के लिए), दिशांत मेहता (एसोसिएट फंड मैनेजर – इक्विटी हिस्से के लिए) और राकेश शेट्टी (फंड मैनेजर – डेट हिस्से के लिए) प्रबंधित करेंगे।

मोतीलाल ओसवाल निफ़्टी रीट्सऔर रियल्टी इंडेक्स फंड

(एक ओपन-एंडेड स्कीम जो ट्रैकिंग एरर के अधीन, निफ़्टी रीट्सऔर रियल्टी टोटल रिटर्न इंडेक्स का अनुसरण करती है)

एनएफओ के दौरान ऊपर बताई गई उत्पाद लेबलिंग, योजना की विशेषताओं या मॉडल पोर्टफोलियो के अंदरूनी मूल्यांकन पर आधारित है। एनएफओके बाद, जब असल में निवेश किया जाएगा, तो इसमें बदलाव हो सकता है।

मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के बारे में:

Motilal Oswal Group possesses a legacy in equities for over 3 decades. Motilal Oswal Asset Management Company Ltd. (MOAMC) is registered with SEBI as the Investment Manager for Motilal Oswal Mutual Fund. It was incorporated on November 14, 2008. It provides Investment Management and Advisory Services to investors based within and outside India and has Mutual Funds, AIFs and Portfolio Management Services business.

स्रोत: एमओएएमसी शोध, एनएसई, आईआरए, सीआरएडीएआई- एनारॉक

31stअगस्त, 2026 पर उपलब्ध डाटा पर आधारित

अस्वीकरण:

यह विज्ञप्ति आंतरिक डाटा, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और भरोसेमंद माने जाने वाले अन्य स्रोतों के आधार पर जारी कियाा गया है। इस दस्तावेज़ में दी गई जानकारी केवल सामान्य उद्देश्यों के लिए है और इसमें हर ज़रूरी तथ्य की पूरी जानकारी नहीं दी गई है। यहाँ बताए गए स्टॉक/सेक्टर (यदि कोई हों) का इस्तेमाल सिद्धांत को समझाने के लिए किया गया है और इन्हें किसी भी पक्ष के लिए निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए। यहाँ दी गई जानकारी/डाटा अकेले काफ़ी नहीं है और इसका इस्तेमाल निवेश रणनीति बनाने या उसे लागू करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इस विज्ञप्ति में शामिल सभी राय, आँकड़े, अनुमान और डाटा वर्तमान तारीख के अनुसार हैं और बिना किसी सूचना के इनमें बदलाव हो सकता है। इस विज्ञप्ति के आधार पर लिए गए किसी भी फ़ैसले के लिए पाठक पूरी तरह से ज़िम्मेदार होंगे।

पैसिव इन्वेस्टमेंट: इस योजना को एक्टिव रूप से प्रबंधित नहीं किया जाता है। चूंकि यह योजना अपने इंडेक्स से जुड़ी है, इसलिए भारतीय बाज़ार में इसके आधार इंडेक्स से जुड़ी गिरावट का इस पर असर पड़ सकता है। अपने निवेश उद्देश्य के अनुसार, यह योजना अपने आधार इंडेक्स में शामिल सिक्योरिटीज़ में निवेश करती है, चाहे उनका निवेश मेरिट कुछ भी हो। एएमसी अलग-अलग स्टॉक चुनने या गिरते बाज़ार में डिफेंसिव पोजीशन लेने की कोशिश नहीं करती है।

इंडेक्स फंड: एक इंडेक्स योजना होने के नाते, यह योजना पैसिव इन्वेस्टमेंट तकनीक अपनाती है और बाज़ार की स्थितियों की परवाह किए बिना केवल चुने हुए इंडेक्स में शामिल सिक्योरिटीज़ में निवेश करती है। अगर सिक्योरिटीज़ के बाज़ार में गिरावट आती है, तो स्कीम के पास मौजूद निवेश काा मूल्य कम हो जाएगा।

स्कीम से जुड़े खास जोखिम: योजना अंतर्गत रियल एस्टेट और रीट्समें किया गयाअधिक निवेश इसे प्रॉपर्टी बाज़ार के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बनाता है। ऑक्यूपेंसी या रेंटल यील्ड में कमी आने से सीधे तौर पर मूल्यांकन कम हो सकता है। रीट्सकी कीमतें ब्याज दरों में बदलाव से भी प्रभावित होती हैं; क्योंकि बढ़ती ब्याज दरों से रेंटल इनकम पर लागू डिस्काउंट रेट और कर्ज चुकाने की लागत बढ़ जाती है, जिससे मूल्यांकन और बांटी जाने वाली वापसी, दोनों पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा, रीट्सके अनिवार्य डिस्ट्रीब्यूशन लेवल, लेवरेज लिमिट या डिस्ट्रीब्यूशन पर टैक्स से जुड़े रेगुलेटरी बदलाव भी असल वापसी को बदल सकते हैं। चूंकि इस योजना में सेक्टर डाइवर्सिफिकेशन (अलग-अलग सेक्टर में निवेश) की कमी है, इसलिए ये जोखिम बढ़ सकते हैं, जिससे विविधिकृत फंड की तुलना में इसमें ज़्यादा गिरावट और रिकवरी में ज़्यादा समय लग सकता है। जोखिम के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए स्कीम के योजना जानकारी दस्तावेज़ (SID) को देखें।

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