
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में किसानों की बदहाल स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कम बारिश, सूखती फसल, सिंचाई और बिजली की कमी तथा मंडियों में उपज के उचित दाम नहीं मिलने से किसान परेशान हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार संभावित किसान आंदोलन को रोकने की तैयारी कर रही है।
पटवारी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया कि जुलाई में हुए मूंग आंदोलन के बाद दिल्ली में किसान आंदोलन के दौरान अपनाई गई रणनीतियों का अध्ययन कर खुफिया स्तर पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें भोपाल के 16 प्रमुख प्रवेश एवं निकास मार्गों पर कंक्रीट ब्लॉक, कंटेनर, कंटीले तार, अस्थायी बैरिकेड और कंटेनमेंट जोन बनाए जाने की संभावित व्यवस्था का उल्लेख है।
उन्होंने कहा कि सरकार को भोपाल के प्रवेश मार्गों पर बैरिकेड लगाने के बजाय 16 संभागीय स्तर के किसान शिकायत केन्द्र स्थापित करने चाहिए, ताकि राजधानी आने वाले किसानों को रोका नहीं, बल्कि उनकी समस्याएं सुनी जाएं।
पटवारी ने वर्षा के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 1 जून से 30 सितंबर के बीच प्रदेश में 908.4 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य वर्षा 949.5 मिमी है। पश्चिमी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 11 प्रतिशत कम वर्षा हुई, जबकि इंदौर संभाग में 952.20 मिमी के सामान्य के मुकाबले केवल 639.70 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो करीब 33 प्रतिशत कम है।
उन्होंने 30 प्रभावित जिलों में विशेष फसल क्षति सर्वे, न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शी सिंचाई कार्यक्रम, खराब ट्रांसफार्मरों को 48 घंटे में बदलने तथा किसानों को प्रतिदिन 10 से 12 घंटे तीन-फेज कृषि बिजली देने की मांग की।
पटवारी ने प्रस्तावित कंटेनमेंट योजना तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि किसानों को बाजार, सिंचाई और लाभकारी दाम चाहिए, बैरिकेड और पुलिस तैनाती नहीं।
