सऊदी अरब की हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की तैयारी, अमेरिका के समर्थन और पाकिस्तान की सैन्य तैनाती से गरमाया मिडिल ईस्ट

रियाद / वाशिंगटन,  ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने और यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य’ पर कब्जा कर लिए जाने के बाद वैश्विक समुद्री व्यापार पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। इस नाकेबंदी को तोड़ने और हूतियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सऊदी अरब ने एक बड़े सैन्य ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रियाद सीधे तौर पर अपने सैनिकों को युद्ध के मैदान में झोंकने के बजाय 1 लाख से अधिक यमनी सैनिकों की सेना को आगे रखेगा, जबकि सऊदी वायुसेना हवाई हमलों और आधुनिक हथियारों के जरिए उन्हें समर्थन प्रदान करेगी। यह सैन्य कार्रवाई आने वाले हफ्तों में तटीय इलाकों तथा अल-बायदा और मारिब जैसे प्रमुख मोर्चों पर शुरू हो सकती है।

पाकिस्तान ने सऊदी अरब में तैनात किए 40 हजार सैनिक, अमेरिका दे रहा है खुफिया जानकारी और पैट्रियट मिसाइल सुरक्षा

इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सैन्य लामबंदी भी तेज हो गई है। हालिया रक्षा समझौतों के तहत पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सीमाओं की सुरक्षा और मिसाइल-ड्रोन हमलों से बचाव के लिए अपने 30 से 40 हजार सैनिकों के साथ-साथ सैन्य उपकरण और सलाहकार तैनात कर दिए हैं। इसके अलावा, अमेरिका ने भी सऊदी और कतर के तेल बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) की सुरक्षा के लिए पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं तथा हूती ठिकानों के खिलाफ रियाद को खुफिया जानकारियां मुहैया करा रहा है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में सीधे सैन्य हस्तक्षेप या अमेरिकी हवाई हमलों की मांग को हरी झंडी नहीं दी थी, लेकिन सुरक्षा सहायता लगातार जारी है।

यमन के आंतरिक गुटों में आपसी मतभेद और हूतियों की मजबूत पकड़ बनी सऊदी अरब के लिए सबसे बड़ी चुनौती

भले ही सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ इस बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है, लेकिन रियाद के सामने जमीनी स्तर पर कई गंभीर चुनौतियां भी खड़ी हैं। यमन के भीतर हूतियों का विरोध करने वाले विभिन्न गुटों में वैचारिक और राजनीतिक एकराय का अभाव है, क्योंकि अतीत में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा अलग-अलग गुटों को समर्थन दिए जाने के कारण आपसी संघर्ष की स्थिति बनती रही है। मध्य पूर्व मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि हूतियों के पास एक साथ कई मोर्चों पर आक्रामक रुख अपनाने की क्षमता है, जिसके चलते इस बड़े जमीनी अभियान को अंजाम देना सऊदी गठबंधन के लिए आसान नहीं होगा।

Next Post

सलमान खान की वॉर ड्रामा फिल्म 'मातृभूमि' को मिली सरकारी मंजूरी, रक्षा मंत्रालय की एनओसी मिलने से रिलीज का रास्ता साफ

Sat Oct 3 , 2026
मुंबई,  बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की बहुप्रतीक्षित वॉर ड्रामा फिल्म ‘मातृभूमि’ को लेकर पिछले लंबे समय से छाई अनिश्चितता के बादल आखिरकार छंट गए हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इस फिल्म को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया है। शुरुआती दौर […]

You May Like