नयी दिल्ली, 03 अक्टूबर (वार्ता) राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को देशभर में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया और इनके साथ ही जन योजना अभियान 2026-27, ‘सबकी योजना, सबका विकास’ का भी शुभारंभ हुआ, जिसके तहत पंचायतें वित्तीय वर्ष 2027-28 के लिए अपनी पंचायत विकास योजनाएं तैयार करेंगी।
इन ग्राम सभाओं में स्थानीय निवासियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। देशभर में इन 2.42 लाख विशेष ग्राम सभाओं में केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों- मुख्य रूप से पंचायती राज मंत्रालय, ग्रामीण विकास विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, उपभोक्ता हित विभाग, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन विभाग और भूमि संसाधन विभाग की योजनाओं और प्रमुख पहलों पर विशेष रूप से चर्चा की गयी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार विशेष ग्राम सभाओं ने ग्रामीण नागरिकों को सरकार की प्रमुख पहलों और
स्थानीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा में भाग लेने के लिए एक सीधा मंच प्रदान किया। व्यापक विचार-विमर्श में पंचायतों को केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों का बेहतर हस्तांतरण, स्वयं के राजस्व के माध्यम से वित्तीय आत्मनिर्भरता, सुरक्षित संपत्ति और भूमि अधिकार, सुनिश्चित रोजगार और आजीविका, सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता, जल सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण जैसे कई क्षेत्र शामिल थे।
इन बैठकों में पिछले 12 वर्षों में किये गये परिवर्तनकारी शासन सुधारों और नागरिक-केंद्रित उपायों सहित प्रमुख सरकारी पहलों को उजागर करने वाली कार्यसूची और जागरूकता सामग्री को पढ़कर सुनाया गया और उस पर चर्चा की गयी। स्थानीय निवासियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने अनुभव, दृष्टिकोण और सुझाव साझा किये, जो ग्राम पंचायत विकास योजनाओं को समृद्ध बनाने में योगदान देंगे।
इन विशेष ग्राम सभाओं के राष्ट्रव्यापी आयोजन को सहयोगी मंत्रालयों और विभागों के समन्वित प्रयासों, उनके जमीनी स्तर के पदाधिकारियों और माई इंडिया स्वयंसेवकों के सहयोग से संभव बनाया गया। राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तरों पर उनकी सहभागिता ने नागरिक-केंद्रित योजनाओं और पहलों पर सार्थक संवाद को सुगम बनाने में मदद की, साथ ही जमीनी स्तर पर जन भागीदारी और संवाद को मजबूत किया।
समग्र सरकारी दृष्टिकोण अपनाते हुए, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने अन्य मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूरे दिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क बनाये रखा, देश भर में आयोजित विशेष ग्राम सभाओं की प्रगति की समीक्षा की और सहकारी संघवाद की भावना से घनिष्ठ समन्वय को सुगम बनाया। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के समन्वित प्रयासों, उनके पंचायती राज विभागों, जिला प्रशासनों और जमीनी स्तर के पदाधिकारियों के सहयोग से, इस अभूतपूर्व राष्ट्रव्यापी अभ्यास का सुचारू संचालन सुनिश्चित हुआ।
पंचायती राज मंत्रालय द्वारा केन्द्र सरकार के 21 मंत्रालयों और विभागों के सहयोग से चलाया जा रहा जन योजना अभियान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘सम्पूर्ण सरकार’ के दृष्टिकोण को दर्शाता है। मंत्रालय 2018 से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जन योजना अभियान चला रहा है, ताकि पंचायतों को साक्ष्य-आधारित, समग्र और सहभागी योजनाएं तैयार करने में सक्षम बनाया जा सके। राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत, मंत्रालय स्थानीय विकास के नौ विषयों पर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सहयोग प्रदान करता है। पच्चीस लाख से अधिक ग्राम पंचायतें सहभागी ग्राम पंचायत विकास योजनाएं तैयार करती हैं और उन्हें ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर अपलोड करती हैं, जबकि पंचायत उन्नति सूचकांक प्रत्येक ग्राम पंचायत को अपनी उपलब्धियों और कमियों की पहचान करने में मदद करता है। इस आधार पर, ग्राम सभा प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर संकल्प ले सकती है, जिससे सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण और विकसित भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया जा सके।
सोलहवें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए वर्ष 2026-31 के लिए 4,35,236 करोड़ रुपये की अनुशंसा की है, जो पंद्रहवें वित्त आयोग की तुलना में लगभग 84 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही प्रति व्यक्ति वार्षिक अनुदान लगभग 400 रुपये से बढ़कर लगभग 950 रुपये हो गया है। समर्थ पंचायत पोर्टल पर 57 लाख से अधिक करदाताओं और 15 लाख संपत्तियों का पंजीकरण हो चुका है, और आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार के अंतर्गत एक करोड़ रुपए तक के प्रोत्साहन दिये जाते हैं। पंचायत लेखा-जोखा अब केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा अपनाई जाने वाली छह स्तरीय संरचना का अनुसरण करता है, और 2.5 लाख से अधिक पंचायती राज संस्थाएं ऑडिट ऑनलाइन प्रणाली से जुड़ चुकी हैं। ग्राम क्षेत्रों में उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ ग्राम आबादी और मानचित्रण सर्वेक्षण (एसवीएएमआईटीवीए) योजना के तहत, 2.06 लाख गांवों के लिए 3.33 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं, लगभग 1,713 करोड़ रुपए के ऋण स्वीकृत किये गये हैं और महिलाओं को संपत्ति मालिकों के रूप में मान्यता देने को प्रोत्साहित किया गया है।
एक जुलाई 2026 से लागू विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत पात्र ग्रामी
परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों का मजदूरी रोजगार सुनिश्चित किया जाता है, जिसमें फेस ऑथेंटिकेशन और डिजिटल भुगतान के माध्यम से उपस्थिति दर्ज की जाती है। अब तक इसमें 31.69 करोड़ से अधिक व्यक्ति-दिवस सृजित किये जा चुके हैं, लगभग 2.23 करोड़ परिवारों के 2.81 करोड़ से अधिक श्रमिकों को रोजगार प्राप्त हुआ है, और लगभग 2.31 लाख ग्राम पंचायतों में कार्य प्रगति पर हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 2026-27 के लिए 93,841 करोड़ रुपए का अंतरिम आवंटन किया गया है, और विकसित ग्राम पंचायत योजना ग्राम सभा को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कार्यों का निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।
कई मंत्रालयों/ विभागों ने ग्राम स्तर पर जागरूकता सुनिश्चित करने में बहुमूल्य सहयोग प्रदान किया। गृह मंत्रालय ने नये आपराधिक कानूनों, जैसे भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय सक्षम अधिनियम, के बारे में जागरूकता फैलाने में सहायता की। सहकारिता मंत्रालय ने डिजिटल रूपांतरण और सहकारिता सुदृढ़ीकरण में, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल विवाह मुक्त भारत में और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने नशा मुक्त भारत अभियान में सहयोग दिया, ताकि सुरक्षित, स्वस्थ, बाल विवाह मुक्त और नशामुक्त गांवों का निर्माण हो सके।
इन विशेष ग्राम सभाओं ने ग्राम सभा को सहभागी लोकतंत्र और स्थानीय शासन की नींव के रूप में पुनः रेखांकित किया पंचायती राज मंत्रालय जन योजना अभियान के तहत 2027-28 के लिए जन-केंद्रित पंचायत विकास योजनाओं की तैयारी के लिए तत्पर है, ताकि विकसित भारत के व्यापक प्रयास के अंतर्गत सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित पंचायतों का निर्माण किया जा सके।

