इंदौर:देवी अहिल्या विश्वविद्यालय डीएवीवी और त्रिपुरा केंद्रीय विश्वविद्यालय, अगरतला के बीच 2 अक्टूबर को समझौता ज्ञापन एमओयू हुआ. पांच वर्ष के इस समझौते के तहत दोनों विश्वविद्यालय जनजातीय अध्ययन, भाषाओं के संरक्षण, प्रबंधन, संयुक्त शोध, छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान और फील्ड वर्क के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे.समझौते के तहत मध्य प्रदेश और त्रिपुरा के जनजातीय समुदायों के स्वदेशी ज्ञान, लोककला, मौखिक परंपराओं और संकटग्रस्त भाषाओं का दस्तावेजीकरण कर डिजिटल आर्काइव तैयार किए जाएंगे. विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप और संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों के साथ फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम भी आयोजित किए जाएंगे.
शुरुआती चरण में डीएवीवी के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज और स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज के साथ त्रिपुरा विश्वविद्यालय के बिजनेस मैनेजमेंट, टूरिज्म एडमिनिस्ट्रेशन, भाषाविज्ञान एवं जनजातीय भाषाएं और कोकबोरोका विभाग मिलकर कार्य करेंगे. जनजातीय उद्यमिता, इको-टूरिज्म और सतत आजीविका पर संयुक्त शोध भी प्रस्तावित है.
समझौते के तहत यूजीसी के मानकों के अनुरूप संयुक्त या ड्यूल डिग्री पाठ्यक्रम विकसित करने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी. समझौता त्रिपुरा विश्वविद्यालय के 40वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान हुआ. इस अवसर पर डीएवीवी के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई और आईएमएस के निदेशक प्रो. दीपक श्रीवास्तव मौजूद रहे.
