कोलकाता, (वार्ता) पश्चिम बंगाल वाममोर्चा और उसके सहयोगी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को तुरंत रोकने और सूची से हटाये गये मतदाताओं का नाम बहाल करने की मांग को लेकर शुक्रवार को यहां विशाल रैली का आयोजन किया।
देशव्यापी कार्यक्रम के तहत आयोजित यह मार्च रानी रासमणि एवेन्यू से शुरू होकर एस्प्लेनेड बस स्टैंड, मेट्रो स्टेशन और प्रेस क्लब से गुजरते हुए महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास समाप्त हुआ।
गांधी जयंती के अवसर पर वामपंथी नेताओं ने गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया।
यह प्रदर्शन दो से आठ अक्टूबर तक विपक्षी दलों के चलाये जा रहे ‘लोकतंत्र बचाओ यात्रा’ कार्यक्रम का हिस्सा है। वामदलों ने कहा कि उनका यह अभियान इस अवधि के दौरान पूरे राज्य में जारी रहेगा।
इस रैली का आयोजन मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत वाममोर्चा के साथ-साथ भाकपा-माले (लिबरेशन), एसयूसीआई और अन्य वामपंथी दलों ने किया था। एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स (एपीडीआर) सहित मानवाधिकार और नागरिक समाज संगठनों ने भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
मार्च से पहले रानी रासमणि एवेन्यू में वामपंथी नेता श्रीदीप भट्टाचार्य की अध्यक्षता में एक सभा आयोजित की गयी। गांधी प्रतिमा की ओर मार्च शुरू करने से पहले नेताओं ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा को संबोधित करते हुए माकपा के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने आरोप लगाया कि संवैधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है और चुनाव आयोग इस तरह से काम कर रहा है, जिससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
श्री सलीम ने आरोप लगाया, “आज संविधान को नष्ट किया जा रहा है। श्री कुमार को नियुक्त कर संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं।”
उन्होंने भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप भी लगाया और दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटाये गये हैं।
वामदलों ने चार सूत्री मांग रखी, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना, एसआईआर प्रक्रिया को वापस लेना, हटाये गये मतदाताओं के नाम बहाल करना और चुनाव आयोग के स्वतंत्र व लोकतांत्रिक कामकाज को बहाल करना शामिल है।
उन्होंने यह भी मांग की कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार एक पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की जाए।
वामपंथी नेताओं ने आरोप लगाया कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद सीईसी ने एकतरफा फैसले लिये हैं और यह प्रक्रिया संवैधानिक व लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए खतरा है। उन्होंने नागरिकों के चुनावी अधिकारों की रक्षा का हवाला देते हुए श्री कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग की।
इस मार्च में भाकपा, माकपा, भाकपा(माले) लिबरेशन, एसयूसीआई(सी), आरएसपी और फॉरवर्ड ब्लॉक सहित करीब 10 वामपंथी दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
उपस्थित प्रमुख नेताओं में श्री मोहम्मद सलीम, श्री सुजान चक्रवर्ती, श्री प्रबीर देब, श्री कार्तिक पाल और श्री देबाशीष मुखर्जी शामिल थे।
वामदलों ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर मंडरा रहे खतरों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के तहत उनका यह अभियान आठ अक्टूबर तक जारी रहेगा।
