जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत सरपंच को हटाने की कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी माना है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने ग्राम पंचायत दर्शनी, तहसील मंझौली, जिला जबलपुर के निर्वाचित सरपंच सुमित राय को अंतरिम राहत देते हुए पांच जून 2026 को पारित पद से हटाने के आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। न्यायालय ने मामले में शासन और जिला प्रशासन को उन्हें अगली सुनवाई तक सरपंच के रूप में कार्य करने देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सरपंच पद के उपचुनाव की प्रक्रिया को भी अंतरिम आदेश के अधीन रखा है।
दरअसल यह मामलीा मामला सुमित राय की ओर से दायर किया गया था। जिसमें कहा गया कि धारा-40 की कार्रवाई में उन्हें प्रभावी सुनवाई का अवसर नहीं मिला। जांच के दौरान गवाहों से प्रतिपरीक्षण का अवसर नहीं दिया गया तथा अपना पक्ष और साक्ष्य प्रस्तुत करने का समुचित मौका भी नहीं मिला। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट की प्रति भी उपलब्ध नहीं कराई गई। याचिकाकर्ता की ओर से कई न्याय दृष्टांतों का हवाला दिया गया। जिसके बाद न्यायालय ने उनका उल्लेख करते हुए अंतरिम राहत प्रदान की। राज्य निर्वाचन आयोग ने 31 अगस्त को उपचुनाव की अधिसूचना जारी की थी। कोर्ट के आदेश से यह प्रक्रिया भी फिलहाल अंतरिम आदेश के अधीन रहेगी। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
