भोपाल। मध्य प्रदेश में मोबाइल टावर लगाने की प्रक्रिया को लेकर नियमों को ज्यादा स्पष्ट करने की तैयारी है। मोबाइल नेटवर्क की बढ़ती जरूरत के बीच अब टावरों की लोकेशन, जमीन के इस्तेमाल और रेडिएशन की निगरानी जैसे पहलुओं पर एक तय व्यवस्था बनाने की कवायद शुरू हुई है।
*NGT ने दिए गाइडलाइन तैयार करने के निर्देश*
मोबाइल टावरों से जुड़े मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT ने मध्य प्रदेश सरकार को गाइडलाइन/SOP तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें टावरों की स्थापना के लिए वैज्ञानिक आधार और स्थानीय भूमि-उपयोग नियमों को ध्यान में रखने की बात कही गई है।
*स्कूल और अस्पताल के पास क्या होगा?*
NGT के निर्देशों में स्कूल, अस्पताल, खेल मैदान, जेल और रिहायशी क्षेत्रों जैसे स्थानों के आसपास टावर लगाने की साइट को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन जगहों के पास मोबाइल टावर लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित हो गया है। फिलहाल मुख्य बात यह है कि सरकार को वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर स्थानीय नियम और शर्तें तय करनी हैं। अंतिम व्यवस्था SOP तैयार होने के बाद ज्यादा स्पष्ट होगी।
*रेडिएशन को लेकर क्या नियम हैं?*
केंद्रीय दूरसंचार विभाग यानी DoT के मुताबिक मोबाइल टावरों से निकलने वाले EMF रेडिएशन के लिए देश में निर्धारित सुरक्षा मानक पहले से लागू हैं। DoT के अनुसार निर्धारित सीमा के भीतर EMF एक्सपोजर को लेकर स्वास्थ्य नुकसान का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण स्थापित नहीं हुआ है।
मोबाइल टावरों के रेडिएशन की निगरानी के लिए भी व्यवस्था मौजूद है। निर्धारित सीमा से ज्यादा EMF पाए जाने पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
*क्यों जरूरी मानी जा रही है नई व्यवस्था?*
मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं के विस्तार के साथ शहरों और रिहायशी इलाकों में नए टावरों की जरूरत बढ़ती जा रही है। ऐसे में टावर कहां लगाए जाएं, जमीन का इस्तेमाल कैसे हो और सुरक्षा मानकों की निगरानी किस तरह की जाए—इन सवालों को लेकर स्पष्ट स्थानीय नियम जरूरी हैं।
MP में प्रस्तावित नई SOP का उद्देश्य इसी प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है। घर, स्कूल और अस्पतालों के आसपास टावरों के लिए कितनी दूरी या कौन-सी अतिरिक्त शर्तें लागू होंगी, इसका अंतिम जवाब नई गाइडलाइन सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
