नई दिल्ली। भारतीय रेलवे अब पारंपरिक डीजल ईंधन के विकल्प के तौर पर LNG यानी Liquefied Natural Gas की ओर बढ़ रहा है। LNG-powered ट्रेन में पूरी तरह गैस का इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि Dual-Fuel Technology के जरिए LNG और डीजल दोनों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे इंजन को पावर मिलती है और डीजल की खपत को कम करने में मदद मिलती है।
रेलवे पहले ही Dual-Fuel तकनीक के जरिए गैस के इस्तेमाल से डीजल की खपत में करीब 20% तक की बचत हासिल कर चुका है। LNG की खासियत यह है कि इसे CNG की तुलना में ज्यादा ऊर्जा के साथ कम जगह में स्टोर किया जा सकता है, इसलिए लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए यह तकनीक उपयोगी हो सकती है।
हालांकि LNG को बड़े पैमाने पर अपनाने के सामने कई चुनौतियां भी हैं। इसके लिए क्रायोजेनिक टैंक, LNG स्टोरेज, रिफ्यूलिंग स्टेशन और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। ऐसे में सवाल सिर्फ ट्रेन को LNG से चलाने का नहीं, बल्कि पूरे रेलवे नेटवर्क में इसके लिए व्यवस्था तैयार करने का भी है।
तो आखिर LNG ट्रेन कैसे काम करती है, डीजल की कितनी बचत हो सकती है और रेलवे के लिए इसके फायदे और चुनौतियां क्या हैं? जानिए इस खास एक्सप्लेनर में।
