सिंगरौली:नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की विस्थापन नीति के विरोध में बुधवार को मोरवा शहर पूरी तरह बंद रहा। स्थानीय व्यापारियों, आम नागरिकों और विभिन्न वार्डों से पहुंचे विस्थापितों ने एकजुट होकर बाजार बंद रखा। सुबह से ही अधिकांश दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर ताले लटके रहे। इसके बाद बड़ी संख्या में विस्थापित और स्थानीय व्यापारी रैली के रूप में एनसीएल के केंद्रीय मुख्यालय पहुंचे और प्रदर्शन किया।
रैली निकालकर एनसीएल मुख्यालय का घेराव
सुबह से ही मोरवा के अलग-अलग वार्डों से प्रभावित परिवार और विस्थापित नागरिक एकत्र होने लगे। इसके बाद प्रदर्शनकारी रैली के रूप में एनसीएल मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए वर्तमान विस्थापन एवं पुनर्वास नीति के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नीति में प्रभावित परिवारों, जमीन, मकान और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के हितों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया है।
मुआवजा और पुनर्वास को लेकर नाराजगी
विस्थापितों ने आरोप लगाया कि जमीन और परिसंपत्तियों के उचित मुआवजे तथा पुनर्वास को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं व्यापारियों का कहना है कि मोरवा में वर्षों से संचालित उनके कारोबार पर विस्थापन का सीधा असर पड़ेगा। ऐसे में प्रभावित व्यापारियों के लिए रोजगार और व्यवसाय की वैकल्पिक व्यवस्था सहित समुचित पुनर्वास की ठोस योजना बनाई जानी चाहिए।
पुलिस बल रहा तैनात
एनसीएल मुख्यालय पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा बल की तैनाती की गई। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी गई और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा। विस्थापितों ने ऐसी नीति बनाने की मांग की, जिसमें प्रभावित परिवारों के मुआवजे, पुनर्वास और रोजगार सहित उनके हितों का समुचित समाधान हो।
