नई दिल्ली | 06 जनवरी, 2026: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी सेना द्वारा गिरफ्तारी के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक में जबरदस्त घमासान देखने को मिला। रूस और चीन ने इस सैन्य हस्तक्षेप की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन करार दिया है। रूसी राजदूत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले पर तीखा प्रहार करते हुए मादुरो और उनकी पत्नी की तत्काल रिहाई की मांग की। दूसरी ओर, मेक्सिको और क्यूबा जैसे देशों ने भी चेतावनी दी है कि संप्रभुता का ऐसा हनन भविष्य में वैश्विक शांति के लिए विनाशकारी उदाहरण पेश करेगा।
वेनेजुएला सरकार ने सीधे तौर पर अमेरिका पर आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई ड्रग तस्करी के बहाने उसके विशाल तेल भंडारों पर कब्जा करने की एक साजिश है। बैठक के दौरान महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी अपनी चिंता जाहिर की और सवाल उठाया कि क्या किसी लोकतांत्रिक देश के प्रमुख को इस तरह सैन्य बल के जरिए गिरफ्तार करना उचित है। हालांकि, अमेरिका अपने रुख पर अडिग है। उसके सहयोगी देशों, जिनमें ब्रिटेन और अर्जेंटीना शामिल हैं, ने इस कदम को न्यायसंगत ठहराते हुए कहा कि यह तानाशाही और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए एक आवश्यक कार्रवाई थी।
गौरतलब है कि शनिवार को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने वेनेजुएला में घुसकर निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया था, जिन्हें अब न्यूयॉर्क लाया जा चुका है। उन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मादुरो ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया है। वर्तमान में वेनेजुएला के हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, जबकि वैश्विक समुदाय दो धड़ों में बंट गया है। पूरी दुनिया की नजरें अब न्यूयॉर्क की अदालत और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के अगले कड़े फैसलों पर टिकी हुई हैं।

