वाशिंगटन डीसी, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रमों और विवादित मुद्दों पर कोई ठोस और स्वीकार्य प्रस्ताव पेश करता है, तो अमेरिका उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत देने और रुके हुए फंड्स को जारी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी साफ कर दिया है कि जब तक परमाणु सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह से नहीं सुलझाया जाता, तब तक कोई फाइनल डील नहीं होगी। ट्रंप ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने से जुड़े ईरान के शुरुआती प्रस्ताव को नाकाफी बताते हुए खारिज कर दिया था, लेकिन दोनों देशों के बीच कतरी और पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर लगातार जारी है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची बोले- तेहरान ने पेश किया है लॉजिकल प्लान, अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया का है इंतजार
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के सिलसिले में न्यूयॉर्क में मौजूद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने और महत्वपूर्ण शिपिंग लेन (होर्मुज स्ट्रेट) को फिर से खोलने के लिए एक तार्किक और स्पष्ट योजना मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचा दी है। अराघची ने जानकारी दी कि ईरानी पक्ष वॉशिंगटन की ओर से आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष का कहना है कि तेहरान प्रतिबंधों में ढील और फ्रोजन एसेट्स तक पहुंच की मांग पहले कर रहा है, जबकि अमेरिका का मानना है कि ईरान को अपनी पिछली हरकतों—विशेषकर वाणिज्यिक जहाजों पर सैन्य कार्रवाई—को देखते हुए पहले अपने वादों पर खरा उतरना होगा।
व्हाइट हाउस के विशेष दूत और मध्यस्थ सक्रिय, रणनीतिक जलमार्ग होर्मुज स्ट्रेट पर बना हुआ है मुख्य गतिरोध
मौजूदा कूटनीतिक हलचल में अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो बातचीत की कमान संभाले हुए हैं। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया है कि उन्होंने तेहरान को अभी तक कोई प्रत्यक्ष छूट या ऑफर नहीं दिया है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से मध्यस्थों के जरिए संवाद का सिलसिला जारी है। दोनों पक्षों के बीच मुख्य गतिरोध रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट जलमार्ग को खोलने और परमाणु शर्तों को लेकर बना हुआ है, जिस पर आने वाले दिनों में कोई बड़ा निर्णय आने की उम्मीद है।

