इंदौर: गरीबों को खाद्य सुरक्षा देने वाली सरकारी राशन व्यवस्था तकनीकी औपचारिकताओं के बीच पात्र हितग्राहियों के लिए परेशानी बनती जा रही है. सवाल यह है कि केवाईसी और बायोमेट्रिक व्यवस्था का उद्देश्य पात्रों तक राशन पहुंचाना है या उन्हें योजना से बाहर करना?वार्ड क्रमांक 50 के पिपलियापाला स्थित 140 आइडिया मल्टी में निम्न आय वर्ग और मजदूर परिवार बड़ी संख्या में रहते हैं. यहां चर्चा के दौरान कुछ बुजुर्गों ने बताया कि पात्र होने के बावजूद उनका राशन बंद हो गया. किसी को केवाईसी तो किसी को फिंगरप्रिंट के नाम पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
कई असहाय बुजुर्ग महिलाएं ऐसी मिलीं, जो राशन के लिए परिजनों पर निर्भर हैं. अशिक्षित और बुजुर्ग होने के बावजूद अपने हक के राशन के लिए कई बार झोन और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं. विफलता होने से अब इनमें उदासी छाई हुई है. प्रदेश के अगस्त 2026 के सरकारी आंकड़ों में 1.33 करोड़ से अधिक राशन कार्ड और 5.19 करोड़ सदस्य दर्ज हैं, वहीं इंदौर में सत्यापन के आंकड़ों में 23,813 मामले रिजेक्ट दर्ज हैं. ऐसे में सवाल है, क्या तकनीकी खामी के कारण किसी पात्र गरीब का राशन बंद होना उचित है? बुजुर्ग और अशिक्षित हितग्राहियों की मदद की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
इनका कहना है
पति और पुत्र की मृत्यु हो चुकी है. मैं नातिन के यहां रह रही हूं, थोड़ा बहुत राशन से सहारा मिल जाता था, अब वह भी बंद हो चुका है.
– कामेरा इंगले
बहुत समय हो गया राशन नहीं मिल रहा, मेरा कूपन बंद कर दिया. अब कहते हैं आधार कार्ड लेकर आओ. अब मैं कहां भटकूं, कोई मदद करने वाला नहीं.
– हरकु बाई
राशन कार्ड गुम हो गया, नया बनाने के लिए फॉर्म भी भर दिए. कई बार चक्कर लगाए. राशन वाले के पास रिकॉर्ड रहता है, वह भी मदद नहीं कर रहा.
– शर्मिला राठौर
एक जानकारी के अनुसार साठ वर्ष की ऊपर की आयु वालों को नहीं दिया जाता लेकिन मैं क्षेत्र में लोगों से चर्चा कर और विधायक से बात कर योजना लाभ दिलवाने की कोशिश करूंगा.
– राजीव जैन पार्षद
