फोरम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि इन समुदायों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता मिले और उन्हें सदन में प्रभावी ढंग से उठाया जाए। उन्होंने कहा कि तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की तर्ज पर देशभर में विशेष कानून बनाया जाना चाहिए, जिससे विशेष घटक योजना (एससीपी) और जनजातीय उपयोजना (टीएसपी) की राशि को दूसरी मदों में स्थानांतरित करने से रोका जा सके और इस राशि का उपयोग निर्धारित अवधि में किया जा सके।
श्री गौतम ने कहा कि अभी एससीपी और टीएसपी के लिए आवंटित धन में से या तो बहुत कुछ समाप्त कर दिया गया है या बची हुई राशि का दूसरी मदों में इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि कानूनी सिद्धांत के अनुसार इन निधियों को न तो दूसरी मद में स्थानांतरित किया जा सकता है और न ही लैप्स होने दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश राज्यों में इसके बावजूद धन का स्थानांतरण हो रहा है।
उन्होंने कहा कि एससी-एसटी समुदायों के विकास के लिए योजनाएं संबंधित नोडल एससी-एसटी विभाग से आनी चाहिए, लेकिन ऐसी योजनाएं सामने नहीं आ रही हैं। इन समुदायों से जुड़े मामलों को लगातार उठाने और उनकी नियमित निगरानी के लिए संसदीय फोरम की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह फोरम इन शिकायतों को प्रभावी ढंग से सदन के समक्ष रखने का माध्यम बन सकता है।

