
रीवा, रीवा जिले में भारी बारिश के बाद बाढ़ से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। इसी बीच आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का रीवा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का औचक दौरा संभावित है। हालांकि, मुख्यमंत्री के आगमन से ठीक पहले नगर निगम के वार्ड क्रमांक 4 में स्थित खैरी नाई बस्ती के पीड़ितों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। बाढ़ की आपदा में फंसे इन लोगों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और राहत सामग्री न पहुंचाने का आरोप लगाते हुए सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया है।
दरअसल बाढ़ के मूसलाधार पानी ने खैरी बस्ती में रहने वाले सैकड़ों परिवारों की जिंदगी तबाह कर दी है। घरों में पानी घुसने से लोगों का राशन और अनाज पूरी तरह सड़ चुका है। बस्ती में पिछले कुछ दिनों से खाने-पीने के लाले पड़े हुए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि आपदा के समय उन्हें प्रशासन की ओर से कोई मदद या भोजन पैकेट उपलब्ध नहीं कराए गए।फिलहाल आज आक्रोशित महिलाएं और पुरुष अपने घरों का सड़ा हुआ चावल और अनाज हाथों में लेकर मुख्य सड़क पर जमा हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि वे इस सड़े हुए अनाज को मुख्यमंत्री को दिखाने के लिए उनका इंतजार कर रहे हैं ताकि सरकार को जमीनी हकीकत का पता चल सके।खैरी नाई बस्ती के पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि वे लंबे समय से बेहद गरीब परिस्थितियों में झोपड़ियों और कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं। बाढ़ के पानी ने उनकी इन झोपड़ियों को भी उजाड़ दिया है और उनका सारा घरेलू सामान बर्बाद हो गया है।
पीड़ित परिवारों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांग की है की विस्थापित और बेघर हो चुके परिवारों के लिए भोजन और सुरक्षित आश्रय का तुरंत इंतजाम किया जाए।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पात्रता के बावजूद उन्हें अब तक ‘प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है, जिसके कारण वे इन असुरक्षित झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने तुरंत पक्के मकान देने की मांग उठाई है।
गौरतलब है की एक तरफ जहां उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और जिला प्रशासन द्वारा लगातार बाढ़ प्रभावित राहत शिविरों का निरीक्षण करने और भोजन-दवाई के पर्याप्त प्रबंध होने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं खैरी बस्ती से आई यह तस्वीरें प्रशासन की मुस्तैदी पर बड़े सवाल खड़े करती है। हालांकि एसडीआरएफ की टीमों ने इस इलाके से कई लोगों का रेस्क्यू किया था, लेकिन रेस्क्यू के बाद पीड़ितों तक बुनियादी राहत सामग्री जैसे सूखा राशन, तिरपाल और तैयार भोजन का न पहुंचना उनके आक्रोश का मुख्य कारण बना हुआ है।
फिलहाल, पूरी बस्ती के लोग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आने के इंतजार में सड़कों पर डटे हुए हैं। पीड़ितों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी रहने और खाने की स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती तब तक वह यही डटे रहेंगे।
