भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का जम्मू-कश्मीर दौरा केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि इसके राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी महत्वपूर्ण हैं. खासकर उनका यह कहना कि ‘कश्मीर भारत का एक अहम हिस्सा है’, पाकिस्तान के लिए निश्चित रूप से असहज करने वाला बयान है. यही कारण है कि पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रभारी राजदूत को तलब कर इस टिप्पणी पर अपना विरोध दर्ज कराया. दरअसल, पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय विवाद के रूप में पेश करने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी यह रणनीति लगातार कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है.
सर्जियो गोर का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने यह बात श्रीनगर पहुंचकर कही है. वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद किसी मौजूदा अमेरिकी राजदूत की यह पहली कश्मीर यात्रा है. ऐसे समय में जब भारत जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति, विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है, अमेरिकी राजदूत का घाटी में पहुंचना और वहां की स्थिति को प्रत्यक्ष रूप से देखना अपने आप में महत्वपूर्ण संकेत है.पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि वह कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय विवाद के रूप में पेश कर अमेरिका सहित पश्चिमी देशों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना चाहता रहा है. लेकिन अमेरिका का मौजूदा रुख यह संकेत देता है कि वॉशिंगटन कश्मीर को भारत-पाकिस्तान के बीच किसी नए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के मुद्दे के रूप में देखने के बजाय भारत के हिस्से के रूप में स्वीकार करता है. यही पाकिस्तान की बेचैनी का मूल कारण है.
यह भी ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका ने कश्मीर पर भारत के रुख का समर्थन करते हुए पाकिस्तान को कोई नया अवसर नहीं दिया है. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शब्दों का चयन बहुत मायने रखता है. किसी अमेरिकी राजदूत का भारत की धरती पर कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताना पाकिस्तान के उस नैरेटिव को झटका है, जिसे वह दशकों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आगे बढ़ाता रहा है. दरअसल,दुनिया के अधिकांश देशों के साथ अमेरिका भी यह समझता है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और महत्वपूर्ण हिस्सा है. अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी भारत की संप्रभुता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई व्यापक चुनौती सामने नहीं आई. इसके उलट, समय के साथ कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया, पर्यटन, निवेश और विकास गतिविधियों के विस्तार ने भारत के पक्ष को और मजबूत किया है.अमेरिकी राजदूत का यात्रा सलाह की समीक्षा का संकेत देना भी महत्वपूर्ण है. यदि अमेरिका जम्मू-कश्मीर को पर्यटकों के लिए अधिक सुरक्षित मानते हुए अपनी ट्रैवल एडवाइजरी में बदलाव करता है तो यह भारत की सुरक्षा और सामान्य स्थिति के दावे को अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता देगा. इससे विदेशी पर्यटकों और निवेशकों के बीच भी सकारात्मक संदेश जाएगा. पाकिस्तान को अब यह समझना होगा कि कश्मीर का मुद्दा उठाकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने की उसकी कोशिश पहले जैसी प्रभावी नहीं रही. बहरहाल,सर्जियो गोर का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के पक्ष में राजनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि भारत में अमेरिकी राजदूत द्वारा कश्मीर की धरती पर व्यक्त किया गया विचार है. यही बात पाकिस्तान को सबसे अधिक हजम नहीं हो रही है. कश्मीर पर भारत की स्थिति को लेकर दुनिया का बदलता नजरिया पाकिस्तान के लिए स्पष्ट संदेश है कि अब केवल पुराने दावों और प्रस्तावों का हवाला देकर वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रभावित नहीं कर सकता. भारत के साथ उसके संबंधों का भविष्य भी इसी वास्तविकता को स्वीकार करने पर निर्भर करेगा.
