
वर्ष 1961 में प्रदर्शित फिल्म ‘जंगली’ में सायरा बानु के अपोजिट शम्मी कपूर थे। इस फिल्म में सायरा बानु ने कश्मीर में रहने वाली युवा लड़की की भूमिका निभाई। बेहतरीन गीत-संगीत और अभिनय से सजी इस फिल्म की जबरदस्त कामयाबी ने न सिर्फ सायरा बानु, बल्कि अभिनेता शम्मी कपूर को भी स्टार के रूप में स्थापित कर दिया। आज भी इस फिल्म के सदाबहार गीत दर्शकों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। वर्ष 1963 में सायरा बानु को मनमोहन देसाई निर्मित फिल्म ‘ब्लफ मास्टर’ में काम करने का अवसर मिला। इस फिल्म में एक बार फिर उनके नायक की भूमिका अभिनेता शम्मी कपूर ने निभाई थी।
वर्ष 1964 सायरा बानु के करियर का अहम वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उनकी ‘मिलन की बेला’ जैसी सुपरहिट फिल्में प्रदर्शित हुईं। इन फिल्मों की सफलता के बाद सायरा बानु फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गईं। वर्ष 1966 में सायरा बानु ने दिलीप कुमार के साथ शादी कर ली। दिलीप कुमार से शादी करने के बाद भी सायरा बानु ने फिल्मों में काम करना जारी रखा। वर्ष 1967 सायरा बानु के करियर का अहम वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष जहां उन्हें अभिनेता राज कपूर के साथ पहली बार फिल्म ‘दीवाना’ में काम करने का अवसर मिला, वहीं उनकी फिल्म ‘शागिर्द’ टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई। वर्ष 1968 में प्रदर्शित फिल्म ‘पड़ोसन’ सायरा बानु के सिने करियर की सुपरहिट फिल्मों में शुमार की जाती है। हास्य से परिपूर्ण महमूद निर्मित इस फिल्म में सायरा बानु ने एक युवा लड़की बिंदु की भूमिका निभाई, जिसे संगीत में विशेष रुचि है और जिसे सुनील दत्त और महमूद दोनों ही प्यार करने लगते हैं। इस फिल्म में उन पर फिल्माया गया गीत ‘मेरे सामने वाली खिड़की में एक चांद का टुकड़ा रहता है’ श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ था।
वर्ष 1970 में सायरा बानु को मनोज कुमार के निर्माण और निर्देशन में बनी सुपरहिट फिल्म ‘पूरब और पश्चिम’ में काम करने का अवसर मिला। फिल्म में सायरा बानु ने विदेश में पली-बढ़ी ऐसी युवती की भूमिका निभाई, जो अपने देश की संस्कृति से अनभिज्ञ रहती है। फिल्म में उनका यह किरदार कुछ हद तक ग्रे शेड लिए हुए था, बावजूद इसके वह दर्शकों का दिल जीतने में सफल रहीं। वर्ष 1970 में प्रदर्शित फिल्म ‘गोपी’ में सायरा बानु को अपने सिने करियर में पहली बार अभिनेता दिलीप कुमार के साथ काम करने का अवसर मिला। इसके बाद दिलीप कुमार और सायरा बानु की जोड़ी ने ‘सगीना’, ‘बैराग’ और ‘दुनिया’ जैसी फिल्मों में एक साथ काम करके दर्शकों का मनोरंजन किया।
वर्ष 1975 में सायरा बानु को ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘चैताली’ में काम करने का अवसर मिला। फिल्म में उन्होंने चैताली की शीर्षक भूमिका निभाई। हालांकि यह फिल्म टिकट खिड़की पर विफल रही, लेकिन समीक्षकों का मानना है कि यह सायरा बानु के सिने करियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक है। वर्ष 1976 में प्रदर्शित फिल्म ‘हेराफेरी’ सायरा बानु के सिने करियर की अंतिम हिट फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में उनके नायक की भूमिका अमिताभ बच्चन ने निभाई थी। वर्ष 1988 में प्रदर्शित फिल्म ‘फैसला’ के बाद सायरा बानु ने फिल्म इंडस्ट्री से संन्यास ले लिया।
वर्ष 2006 में सायरा बानु ने भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा और ‘अब तो बन जा सजनवा हमार’ का निर्माण किया। नगमा और रवि किशन की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई। सायरा बानु ने अपने करीब चार दशक लंबे सिने करियर में लगभग 50 फिल्मों में अभिनय किया। उनकी अभिनीत उल्लेखनीय फिल्मों में ‘दूर की आवाज’, ‘आओ प्यार करें’, ‘झुक गया आसमान’, ‘आदमी और इंसान’, ‘विक्टोरिया नंबर 203’, ‘पैसे की गुड़िया’, ‘इंटरनेशनल क्रुक’, ‘रेशमी की डोरी’, ‘आखिरी दांव’, ‘साजिश’, ‘जमीर’, ‘नहले पे दहला’, ‘काला आदमी’, ‘देशद्रोही’ और ‘बलिदान’ शामिल हैं।
