न्यूयॉर्क, UNGA में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया और सुरक्षा परिषद सुधार में पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रतिनिधित्व पर चेताया।
रूस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह भारत का सच्चा दोस्त है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया। इस दौरान लावरोव ने भाषण देते हुए UNGA में UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया और इसे जरूरी बताया।
सर्गेई लावरोव ने यहीं नहीं रुके उन्होंने पश्चिमी देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के खिलाफ कड़ी चेतावनी भी दी। महासभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि UN सुरक्षा परिषद में किसी भी सुधार से परिषद और उसके स्थायी सदस्यों के विशेषाधिकार कम नहीं होने चाहिए।
जर्मनी और जापान को सीटें देने के खिलाफ रूस
सर्गेई लावरोव ने मॉस्को के सैद्धांतिक रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि सुधारों में पश्चिमी देशों को अतिरिक्त सीटें देने से बचना चाहिए। उनके मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार में पश्चिमी देशों के लिए कोई अतिरिक्त स्थायी सीट नहीं होनी चाहिए। उनका इशारा जर्मनी और जापान सीट देने की ओर था। उन्होंने कहा कि ये देश अब सैन्यवाद और बदले की भावना की राह पर चल पड़े हैं।
लावरोव ने कहा कि मॉस्को एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के पक्ष में है। हम स्थायी सीट के लिए ब्राजील और भारत की दावेदारी का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया में अफ्रीकी महाद्वीप के हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
UNSC सीट के लिए किन देशों ने किया भारत का समर्थन
UN सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी को रूस के अलावा कई देशों का समर्थन मिल चुका है। जापान और जर्मनी ने भी भारत का समर्थन किया है। मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने UNGA में कहा कि उनका देश UNSC सुधार को लेकर G4 और L69 के रुख का समर्थन करता है।
धनंजय रामफुल ने भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के अपने समर्थन को दोहराया। मॉरीशस के विदेश मंत्री के मुताबिक, वैश्विक मामलों में भारत की रचनात्मक भूमिका को देखते हुए उसे स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए। पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने भी सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत की दावेदारी का समर्थन किया है।
UNSC में सुधार की मांग तेज
UNSC में फिलहार पांच देशों चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के पास स्थायी सदस्यता है। इन्हीं पांच देशों के पास विटो पावर भी हैं। इन पांच देशों के अलावा इसमें 10 गैर-स्थायी सदस्य होते हैं, जिनका कार्यकाल दो साल का होता है। हालांकि लंबे समय से इसमें सुधार और भारत, ब्राजील, जापान और जर्मनी जैसे देशों को स्थायी सदस्यता देने की मांग की जा रही है।
