करोड़ों खर्च, फिर भी कान्ह का दर्द बरकरार, गंदे नाले में हुई तब्दील

इंदौर: कभी शहर की जीवनरेखा रही कान्ह नदी आज गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है. नगर निगम द्वारा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और विभिन्न अभियानों के तहत कान्ह नदी के शुद्धिकरण व सीवेज रोकने के नाम पर अब तक करोड़ों रुपए की राशि खर्च की जा चुकी है, लेकिन शहर से प्रतिदिन निकलने वाले सैकड़ों मिलियन लीटर सीवेज के मुकाबले ट्रीटमेंट क्षमता कम होने के कारण आज भी सीवेज के पानी का बड़ा हिस्सा सीधे नदी में मिल रहा है. सवाल यह है कि आखिर कान्ह में गंदा पानी पहुंचना कब बंद होगा?
कान्ह-सरस्वती नदी शुद्धिकरण को लेकर वर्षों से दावे किए जा रहे हैं. वर्ष 2019 में जिला प्रशासन ने करीब 72 किमी नदी क्षेत्र की सफाई गाद हटाने और अतिक्रमण हटाने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की बात कही थी, इसके बाद भी नदी में प्रदूषण का सिलसिला पूरी तरह नहीं रुका. जुलाई 2024 में विधानसभा में दिए सरकारी जवाब के मुताबिक, कान्ह-सरस्वती शुद्धिकरण पर विभिन्न योजनाओं में करीब 724 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके थे, नमामि गंगे और अमृत-2.0 के तहत करीब 766 करोड़ रुपए और प्रस्तावित बताए गए.

सरकार के अनुसार बीओडी (जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग) स्तर भी पहले के 350-400 मिलीग्राम प्रति लीटर से घटकर 30-50 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया है. सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं तो नदी आज भी प्रदूषित क्यों है? हर साल गाद निकालने की जरूरत क्यों पड़ती है? सीवेज और गंदे पानी के स्रोत स्थायी रूप से बंद क्यों नहीं किए जा रहे? वर्षों पहले गठित समितियों की सिफारिशों का क्या हुआ? नदी की सफाई पर खर्च जारी है, लेकिन अब जरूरत केवल गाद निकालने की नहीं, बल्कि प्रदूषण नदी तक पहुंचाने वाले रास्ते हमेशा के लिए बंद कर सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने की है.

इनका कहना है…

सरकार करोड़ों रुपए का बजट बताकर नदी से मिट्ठी और कचरा निकलवा कर किनारों पर छोड़ देती है, जो बारिश होते ही फिर नदी में मिल जाते हैं. जनता को जागरूक होकर खुद आगे आकर नदी को बचाने के अभियान को चलाना होगा.
– राहुल निहोरे, युवा नेता व समाजसेवी

निगम जनप्रतिनिधि इच्छाशक्ति दिखाएं तो शहर के बीचोंबीच बहती कान्ह स्वच्छ नदी की मिसाल बन सकती है. नदी किनारे हरियाली विकसित कर पर्यावरण सुधारा जा सकता है और नदी के पानी को उपयोग योग्य बनाया जा सकता है.
– मुकेश कुमार अमोलिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष, पर्यावरण हितैषी फाउंडेशन

कितने ही आंदोलन हुए, समितियां भी बनाई गईं, पर आज भी कान्ह नदी में गंदे नालों का पानी पहुंच रहा है. हमेशा सरकार स्थायी समाधान की बात करती आ रही है. जमीन पर उसका असर क्यों नहीं दिखता?
– हनीफ पठान, समाजसेवी

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