विदेश मंत्री ने भारत और लाइबेरिया की पहल पर बने ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेरर्स’ की शुक्रवार को न्यूयॉर्क में हुई पहली बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे हमलों को रोकने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हाल के हमलों में भारतीय नाविकों समेत कई देशों के लोगों की जान गयी है।
उन्होंने कहा कि रोजाना 140 अरब डॉलर से अधिक का अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता है और इसका 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा समुद्र से जुड़ा है। करीब 20 लाख नाविक दुनिया के वाणिज्यिक बेड़ों में काम करते हैं।
डॉ जयशंकर ने नाविकों के लंबे समय तक जहाजों पर फंसे रहने, क्रू बदलने और घर लौटने में देरी तथा परिवारों से अलगाव जैसी समस्याओं का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भारत ने नाविकों के लिए आपात समर्थन नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव भी रखा है, जो संकट की सूचना, चिकित्सा सहायता, परिवारों से संपर्क और जरूरत पड़ने पर निकासी में मदद कर सके।