नयी दिल्ली, 25 सितंबर (वार्ता) सरकार ने कहा है कि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने भारत के फार्मास्युटिकल, सक्रिय औषधि अवयव (एपीआई) और चिकित्सा उपकरण विनिर्माण क्षेत्रों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। केंद्र सरकार के औषधि विभाग ने शुक्रवार को बताया कि पीएलआई योजनाओं के माध्यम से घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, आयात पर निर्भरता घटाने, निवेश आकर्षित करने और उन्नत प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि बल्क ड्रग्स के लिए पीएलआई योजना को 2020 में 6,940 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई थी। इसके तहत 41 महत्वपूर्ण उत्पादों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया गया। अब तक 48 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और जून 2026 तक 5,210.74 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। 28 एपीआई/केएसएम के उत्पादन के लिए 39 परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। योजना के तहत पेनिसिलिन-जी, क्लैवुलैनिक एसिड और रिफैम्पिसिन जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों का घरेलू उत्पादन भी शुरू हुआ है। लाभार्थियों ने जून 2026 तक 3,792.49 करोड़ रुपये की बिक्री की, जिसमें करीब 560.16 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है और लगभग 5,127 रोजगार सृजित हुए हैं।
फार्मास्यूटिकल्स के लिए पीएलआई योजना को 2021 में 15,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई थी। इसके तहत बायोफार्मास्यूटिकल्स, कॉम्प्लेक्स जेनेरिक, बायोसिमिलर, दुर्लभ बीमारियों की दवाओं और अन्य उच्च मूल्य वाले उत्पादों के विनिर्माण को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। योजना में 20 एमएसएमई सहित 55 आवेदकों का चयन हुआ है। जून 2026 तक 46,744 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश आकर्षित हुआ, जबकि लक्षित निवेश 17,275 करोड़ रुपये था। इसी अवधि तक 1,21,294 रोजगार सृजित हुए तथा लाभार्थी कंपनियों ने 4,02,869 करोड़ रुपये की संचयी बिक्री की, जिसमें 2,57,370 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है।
चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण के लिए 2020 में 3,420 करोड़ रुपये की पीएलआई योजना मंजूर की गयी थी। इसके तहत एमआरआई मशीन, सीटी स्कैनर, कैथ लैब, लीनियर एक्सेलेरेटर, सी-आर्म, मैमोग्राफी मशीन, अल्ट्रासाउंड सिस्टम, एनेस्थीसिया मशीन और हार्ट वाल्व समेत 57 प्रकार के चिकित्सा उपकरणों का उत्पादन शुरू हुआ है। जीई हेल्थकेयर, सीमेंस, फिलिप्स, वेरेक्स, निप्रो और ओमरोन जैसी कंपनियों ने भारत में विनिर्माण गतिविधियां स्थापित या विस्तारित की हैं। सरकार के अनुसार, तीनों पीएलआई योजनाएं महत्वपूर्ण कच्चे माल और एपीआई से लेकर उच्च मूल्य वाली दवाओं तथा उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकी तक पूरे क्षेत्र की विनिर्माण क्षमता और आपूर्ति-श्रृंखला को मजबूत करने में मदद कर रही हैं।

