मुंबई, आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के ऊर्जा विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की दुखद मौत के तीन दिन बाद छात्रों ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि उनके विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य किसी भी प्रकार की अकादमिक गड़बड़ी को सही ठहराना नहीं था, बल्कि पिछले कुछ समय से चली आ रही सिस्टमिक दिक्कतों और संस्थागत सुधारों की मांग उठाना था ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े। घटना के बाद छात्रों के साथ निदेशक और अन्य प्रशासनिक सदस्यों की एक ‘ओपन हाउस’ बैठक आयोजित की गई, जिसमें छात्रों ने खुलकर अपनी चिंताएं और सवाल रखे।
जाति आधारित भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों पर पुलिस कर रही जांच, परिवार ने दर्ज कराई थी शिकायत
मृतक छात्र के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उनके बेटे को कॉलेज परिसर में जाति के आधार पर भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था, जिसमें एक प्रोफेसर के खिलाफ भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने अपने शुरुआती बयान में स्पष्ट किया था कि साहिल की ओर से प्रशासन या एससी/एसटी सेल में इस तरह की कोई भी औपचारिक (फॉर्मल) शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। फिलहाल इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है, जिससे यह साफ हो सके कि इन आरोपों और छात्र की मौत के बीच कोई सीधा संबंध था या नहीं।
छात्र संघ ने प्रोफेसर को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त रखने की मांग की, जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और स्वतंत्र होने पर जोर
अपने आधिकारिक बयान में स्टूडेंट रिप्रेजेंटेटिव्स ने प्रोफेसर के खिलाफ पहले से कोई राय या पूर्वाग्रह न रखने की बात कही है, साथ ही यह भी मांग की है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित फैकल्टी मेंबर को ‘डीन (एडमिनिस्ट्रेशन)’ के पद से प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त रखा जाए ताकि जांच पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और किसी भी बाहरी दबाव से मुक्त रह सके। छात्रों का मानना है कि इस पूरी दुखद घटना से जुड़े मुद्दों को संस्थान के दायरे में ही बेहद संवेदनशीलता के साथ सुलझाया जाना चाहिए।

