केरल पुलिस ने व्हाट्सएप के ज़रिए होने वाले नए साइबर स्कैम के बारे में दी चेतावनी

तिरुवनंतपुरम, 05 जुलाई (वार्ता) केरल पुलिस ने राज्य भर के व्यापारिक संस्थानों को व्हाट्सएप पर होने वाले एक नयी साइबर धोखाधड़ी के बारे में चौकन्ना किया है। यह फ्रॉड कंपनियों के वित्त और अकाउंट्स विभाग को निशाना बनाता है और इसके लिए ग्राहकों और आपूर्तिकर्ताओं के हैक किए गए खातों का इस्तेमाल किया जाता है।

पुलिस के मुताबिक, धोखेबाज़ उन ग्राहकों या आपूर्तिकर्ताओ के व्हाट्सएप अकाउंट हैक करते हैं जो किसी बिज़नेस के साथ नियमित रूप से पैसों का लेन-देन करते हैं। फिर वे इन अकाउंट्स का इस्तेमाल करके “अकाउंट स्टेटमेंट” डॉक्यूमेंट्स के रूप में खतरनाक फाइलें भेजते हैं।

इन फाइलों में अक्सर .वीबीएस जैसे खतरनाक एक्सटेंशन होते हैं। खोलने पर ये फाइलें मैलवेयर इंस्टॉल कर देती हैं, जिससे हैकर्स पीड़ित के कंप्यूटर का पूरा कंट्रोल हासिल कर लेते हैं।

इसके बाद हमलावर सिस्टम में सेव पासवर्ड और फाइनेंशियल जानकारी चुरा लेते हैं और फिर कंपनी के सीनियर अधिकारियों के व्हाट्सएप अकाउंट्स पर कब्ज़ा कर लेते हैं। इन हैक किए गए अकाउंट्स का इस्तेमाल करके वे नकली बातचीत करते हैं और कर्मचारियों को तुरंत फंड ट्रांसफर करने का निर्देश देते हैं। वे सीनियर अधिकारियों के मैसेज पर होने वाले भरोसे का फायदा उठाते हैं।

केरल पुलिस ने चेतावनी दी है कि अगर कर्मचारी बिना जांच-पड़ताल किए ऐसे अनुरोधों पर कार्रवाई करते हैं, तो व्यवसायों को भारी वित्तीय नुकसान हो सकता है। यह मैलवेयर संक्रमित कंप्यूटर से अन्य व्यावसायिक संपर्कों और समूहों को हानिकारक फ़ाइलें भेजकर अपने आप भी फैल सकता है।

व्यवसायों को सलाह दी गई है कि वे व्हाट्सएप के माध्यम से प्राप्त किसी भी खाता विवरण या फ़ाइल को खोलने से पहले सीधे भेजने वाले से संपर्क करके उनकी पुष्टि कर लें।

पुलिस ने संगठनों से यह भी आग्रह किया है कि वे अनजान एक्सटेंशन वाली फ़ाइलों या संदिग्ध लिंक को डाउनलोड या निष्पादित न करें और स्वतंत्र पुष्टि के बिना केवल व्हाट्सएप संदेशों के आधार पर कभी भी फंड ट्रांसफर को अधिकृत न करें।

यदि मैलवेयर संक्रमण का संदेह हो, तो उपयोगकर्ताओं को तुरंत प्रभावित डिवाइस को इंटरनेट से डिस्कनेक्ट कर देना चाहिए (वाई- फाई बंद करके या लेन केबल हटाकर) और सहायता के लिए निकटतम साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करना चाहिए।

ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों से आग्रह किया गया है कि वे राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से घटना की तुरंत रिपोर्ट करें।

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