
जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में सोमवार से तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) शुरू हुआ। शुभारंभ अवसर पर कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने कहा कि एआई आधारित उच्च तकनीकी ज्ञान आज के समय की आवश्यकता है। शिक्षा व्यवस्था में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के बीच शिक्षकों का नई तकनीकों और डिजिटल संसाधनों से अपडेट रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता शिक्षकों की अकादमिक क्षमता और प्रभावी शिक्षण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विश्वविद्यालय के प्रो. राकेश बाजपेयी ने कहा कि कक्षा शिक्षण से लेकर शोध और अकादमिक कार्यों तक तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी जरूरत को देखते हुए एडूनेट फाउंडेशन के सहयोग से यह अभिनव प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। सीएसआर के तहत आयोजित एफडीपी के पहले दिन एडूनेट फाउंडेशन की एसोसिएट डायरेक्टर (जीआरपी) रितु भटनागर और मास्टर ट्रेनर रोहितदास सेलार ने शिक्षकों को एआई आधारित तकनीकों, डिजिटल स्किल और आईबीएम मॉड्यूल से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी।
बढ़ी है उपयोगिता शिक्षण से शोध तक एआई का इस्तेमाल
दो पालियों में हुए प्रशिक्षण में आधुनिक डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग, एआई की कार्यप्रणाली और डिजिटल कौशल से जुड़े विषयों को उदाहरणों के साथ समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि एआई का उपयोग अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षण, शोध, कंटेंट तैयार करने, डेटा विश्लेषण और अन्य अकादमिक गतिविधियों में भी इसकी उपयोगिता बढ़ रही है। एफडीपी में शिक्षकों को बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने और उनकी डिजिटल दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
