नयी दिल्ली, 21 सितंबर (वार्ता) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व के लिए वैश्विक स्तर पर स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया है। श्री यादव ने सोमवार को जयपुर में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ वैश्विक संरक्षण सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में सौ से अधिक देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि संरक्षण और सह-अस्तित्व के लिए सभी को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा तथा अब तक हासिल प्रगति से आत्मविश्वास लेते हुए साझा उम्मीद और स्पष्ट दिशा के साथ काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या करीब 750 से बढ़कर एक हजार से अधिक हो गयी है। इसी अवधि में बाघ अभयारण्यों की संख्या 47 से बढ़कर 58, हाथी अभयारण्यों की संख्या 30 से बढ़कर 33 और रामसर स्थलों की संख्या 24 से बढ़कर 101 हो गयी है।
श्री यादव ने कहा कि प्रजातियों के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता संवैधानिक और सांस्कृतिक दोनों है और संविधान में वन्यजीवों की रक्षा को राज्य के नीति-निर्देशक दायित्व के साथ-साथ नागरिकों के कर्तव्य के रूप में भी मान्यता दी गयी है। उन्होंने कहा कि भारत सीआईटीईएस, सीएमएस, सीबीडी और रामसर कन्वेंशन का पक्षकार है तथा बाघ, हाथी, गैंडा और एशियाई शेरों की संख्या में सुधार निरंतर संरक्षण प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी प्रणालियों ने संरक्षण कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बाघ, हाथी, डॉल्फिन, शेर और हिम तेंदुए जैसी प्रजातियों के अखिल भारतीय जनसंख्या आकलन से उनके पर्यावास में सुधार, वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा और बड़े वन्यजीवों के संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर योजनाएं बनाने में मदद मिली है। श्री यादव ने राजस्थान में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण प्रजनन की सफलता तथा ओरान पवित्र उपवनों के सामुदायिक नेतृत्व में संरक्षण प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने वन, आर्द्रभूमि और घास के मैदानों के संरक्षण पर जोर देते हुए संरक्षण कार्यकर्ताओं से केवल विचार-विमर्श तक सीमित न रहने बल्कि प्रभावी उपायों को अपनाकर उन्हें जमीन पर लागू करने का आह्वान किया।

