राजकोट, 11 जनवरी (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के राजकोट में रविवार को निवेशकों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि भारत की यह रिफॉर्म जर्नी अब रुकने वाली नहीं है। निवेशक यहां केवल समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने नहीं आए हैं, बल्कि सौराष्ट्र के विकास और उसकी विरासत से जुड़े हैं और उनके निवेश की एक-एक पाई यहां से शानदार रिटर्न देगी।श्री मोदी ने आज यहां ‘वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन’ (वीजीआरसी) में कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही उद्योगों के लिए कुशल मानवबल तैयार करने में भी गुजरात अग्रणी है। राज्य में शिक्षा और कौशल विकास का अंतरराष्ट्रीय इकोसिस्टम उपलब्ध है। गुजरात सरकार की ‘कौशल्य-द स्किल यूनिवर्सिटी’ ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर की यूनिवर्सिटियों के सहयोग से युवाओं को फ्यूचर-रेडी स्किल्स के लिए तैयार कर रही है। इसके अलावा, देश की पहली नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी और गति शक्ति यूनिवर्सिटी के माध्यम से रोड, रेलवे, एयरवेज, वाटरवेज और लॉजिस्टिक्स जैसे हर क्षेत्र के लिए कुशल मानवबल तैयार किया जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया की दो अग्रणी यूनिवर्सिटियों ने भी गुजरात में अपने कैम्पस शुरू कर दिए हैं, जो दर्शाता है कि यहां निवेश के साथ-साथ टैलेंट पाइपलाइन भी सुनिश्चित है।
प्रधानमंत्री ने गुजरात के पर्यटन क्षेत्र की बात करते हुए कहा कि यहां नेचर, एडवेंचर, कल्चर और हेरिटेज का अद्भुत मिश्रण है। उन्होंने लोथल को भारत की साढ़े चार हजार वर्ष पुरानी समुद्री विरासत का प्रतीक बताते हुए कहा कि यहां नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स बन रहा है। कच्छ का रण उत्सव और वहां की टेंट सिटी सैलानियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।
श्री मोदी ने कहा कि गिर फॉरेस्ट में वन्यजीव प्रेमियों के लिए एशियाई शेरों के दर्शन का अनोखा अनुभव है, जहां सालाना नौ लाख से अधिक पर्यटक आते हैं। ब्लू फ्लैग प्रमाणित शिवराजपुर बीच के अलावा मांडवी, सोमनाथ और द्वारका में बीच टूरिज्म की विशाल संभावनाएं हैं, जबकि दीव वाटर स्पोर्ट्स के लिए श्रेष्ट गंतव्य बन रहा है।
उन्होंने सौराष्ट्र के विकास पर बल देते हुए कहा कि इस क्षेत्र में किया जाने वाला हर निवेश गुजरात और पूरे देश के विकास को एक नई गति देगा। उन्होंने रवांडा के उच्चायुक्त की बात का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत द्वारा रवांडा को भेंट में दी गई 200 गिर गायों ने वहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक बड़ी ताकत दी है। आज रवांडा के हजारों परिवारों के पास गिर गायें हैं और वहां हर घर में गिर गाय देखने को मिल रही है।
