मुखबिर तंत्र ध्वस्त: गश्त पर पुलिस नहीं, डकैत, लुटेरे और चोर निकल रहे

जबलपुर: जिले में कानून व्यवस्था के हालात कैसे है ये किसी से छिपी नहीं है, हर दिन लूट, चोरी, होने लगी है, अब तक डकैत भी पुलिस को चुनौती देने से नहीं चूक रहे हैं। दिन-ब-दिन अपराधों का ग्राफ बढ़ता चला जा रहा हैं, लेकिन रात्रि में पुलिस गश्त गायब होने और मुखबिर तंत्र ध्वस्त होने से अपराधियों के हौंसले बुलंद हो चुके हैं, रात में अधिकांश अधिकारी फील्ड की जगह थानों में बैठ कर आराम फरमाते हैं।

जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं, कहने को हर सप्ताह कॉम्बिंग गश्त करती हैं लेकिन इस कॉम्बिंग गश्त में सिर्फ वारंटी ही पकड़े जाते हैं। बढ़ते अपराधों पर अगर नजर दौड़ाई जाएं तो ऐसा लगता है कि अब अपराधी गश्त पर निकल रहे हैं जो बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। जनवरी से जून तक छह माह में 3 डकैती, 76 लूट, 313 चोरियां, 155 गृहभेदन के मामले दर्ज किए गए हैं। कुछ मामलों के आरोपी सलाखों के पीछे है तो कई अब फरार हैं।
ये गिरोह रहते सक्रिय
शहर में पारधी, कंजड़, स्थानीय, डेरा वाले समेत अनेक गिरोह सक्रिय हैं जो रैकी के बाद वारदातों को अंजाम देते हैं और शहर छोडकऱ भाग जाते हैं। डकैती के पुराने रिकॉर्ड देखे जाएं तो पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि जिले में यूपी-बिहार से लेकर बांग्लादेश से भी डकैत आते रहे हैं।
चौराहों से पहरा हुआ गायब
शहर के चौक चौराहों से पलिस का पहरा गायब होने से चोर-लुटेरे और अपराधी बेखौफ वारदातों को अंजाम देते नजर आ रहे है। लुटेरे जहां राह चलते लोगों पर झपट्टा मार रहे है तो चोर सूने घरों के ताले तोड़ रहे है। वहीं पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज अनेक मामलों में पुलिस के हाथ खाली है। आरोपित पुलिस गिरफ्त से दूर है।
बैठकों पर अधीनस्थों पर नहीं असर
अपराधों पर अंकुश लगाने पुलिस कप्तान अधीनस्थों की बैठकें लेते रहते है, जिसमें वे सख्त लहजे में यह भी कहते नजर आते है कि कार्यवाही निष्पक्ष हो, नागरिकों में पुलिस के प्रति सुरक्षा का भाव और बदमाशों में पुलिस का खौफ दिखना चाहिए लेकिन हकीकत कुछ और ही है। बदमाश बेखौफ हैँ और नागरिक दहशत में रहते हैं।
ढुलमुल रवैया बढ़ाए हौंसला
एक समय था जब पुलिस का नाम सुनते ही बड़े से बड़ा बदमाश थरथर कांपता था लेकिन अब हालात यह बन चुके है कि पुलिसकर्मी के सामने भी बदमाश अपराध करने से नहीं चूकते है। पुलिस भी कानून का पालन कराने में नाकाम साबित हो रही है। जिसका मुख्य कारण कुछ पुलिस कर्मचारियों की अपराधियों से यारी और सख्त कार्रवाई न होने और पुलिस के ढुलमुल रवैये के चलते बदमाशों के हौसले बुलंद है।

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