ईरान ने अमेरिका से युद्ध समाप्त करने की शर्तें रखीं, अधिक सख्त जवाब की दी चेतावनी

तेहरान, 20 सितंबर (वार्ता) ईरान ने अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए ताजा शर्तें रखी हैं, साथ ही उसने चेतावनी दी है कि यदि दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू करने की कोशिश की गयी तो वह अधिक ताकत से जवाब देने के लिए तैयार है।

अलजजीरा को दिए एक साक्षात्कार में ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रजाई ने कहा कि ईरान ने कतरी मध्यस्थों के जरिये अमेरिका तक अपनी शर्तें पहुंचा दी हैं। उन्होंने कहा कि फरवरी के उत्तरार्ध में ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुए युद्ध के शुरुआती 40 दिनों की तुलना में ईरान अब नये सिरे से संघर्ष के लिए अधिक बेहतर तरीके से तैयार है।

श्री रजाई ने कहा, “हम अधिक ताकत के साथ अमेरिका का सामना करेंगे और उस पर अधिक संख्या में तथा अधिक भयावह हमले करेंगे।”

दोनों पक्षों के बीच बड़े पैमाने पर जारी लड़ाई महीनों से रुकी हुई है, लेकिन तनाव अब भी बना हुआ है। अमेरिका-ईरान के बीच 17 जून को हुआ 60 दिनों का समझौता पत्र पिछले महीने समाप्त हो गया। इस बीच, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हमले बढ़ गये हैं, जिसे ईरान ने व्यावहारिक रूप से बंद कर दिया है। अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी भी जारी रखी है।

ईरान की नयी शर्तों में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की समाप्ति, अपनी जब्त संपत्तियों की रिहाई, ईरानी बंदरगाहों से नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, ईरान के आंतरिक मामलों में अमेरिकी हस्तक्षेप पर रोक, ‘ईरानी क्रांति के विरोधियों’ के साथ अमेरिकी सहयोग की समाप्ति और ईरानी क्षेत्र पर सभी अमेरिकी हमलों को रोकना शामिल है।

श्री रजाई ने कहा, “इन शर्तों को स्वीकार करना अमेरिका के हित में है। श्री ट्रंप की धमकियों का कोई परिणाम नहीं निकलेगा। हम निर्णायक युद्ध के लिए तैयार हैं।”

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रुख दोहराते हुए कहा कि जब तक अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, यह समुद्री मार्ग बंद रहेगा।

श्री गालीबाफ ने कहा, “जब तक ये शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, ईरानी राष्ट्र के वैध अधिकारों को मान्यता नहीं मिल जाती और अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं करता, तब तक बातचीत की पुरानी स्थिति में लौटने या होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का कोई रास्ता नहीं खुलेगा।”

ईरान की ये नयी मांगें जून में हस्ताक्षरित समझौता पत्र का ही हिस्सा हैं, जिसमें सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, संप्रभुता का सम्मान, आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप, दोनों पक्षों की ओर से नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करना और ईरान की जब्त राशि जारी करना शामिल था।

उस समझौता पत्र में 300 अरब डॉलर की अमेरिकी समर्थित पुनर्निर्माण योजना की भी परिकल्पना की गयी थी। इसके बदले ईरान परमाणु हथियार न खरीदने या विकसित न करने और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमत हुआ था। इस समझौते में ईरानी कच्चे तेल के निर्यात और अन्य सेवाओं के लिए अमेरिकी छूट, ईरान पर नये प्रतिबंध न लगाने और क्षेत्र में अतिरिक्त अमेरिकी बलों की तैनाती न करने की बात भी शामिल थी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि श्री रजाई ने अमेरिका से युद्ध के हर्जाने का कोई जिक्र नहीं किया, जिसकी मांग ईरान ने पहले की थी।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर श्री रजाई ने कहा कि अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से हटने पर विचार कर सकता है, हालांकि ईरान अभी तक इस संधि से बाहर नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि एनपीटी से संभावित वापसी पर विचार चल रहा है और यह फैसला अमेरिकी कदमों पर निर्भर करेगा।उन्होंने कहा, “हमें बेशक धमकियां मिलीं, लेकिन हमने आज तक इस संधि को नहीं छोड़ा है।”

श्री रजाई ने कहा कि ईरान पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने के लिए जारी फतवे का पालन कर रहा है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य के प्रतिबंधों या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान की परमाणु फाइल भेजे जाने के आधार पर स्थिति बदल सकती है।

यमन पर श्री रजाई ने गहराते संघर्ष में ईरानी संलिप्तता से इनकार किया और कहा कि वह युद्धरत पक्षों के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “हम यमन और सऊदी अरब के बीच शांति कायम करने में मदद के लिए पूरी तरह तैयार हैं।” उन्होंने वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बनाने के लिए ईरान के बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करने की अटकलों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह जलमार्ग ‘यमन का मामला है’, जो हूती आंदोलन से जुड़ा है, न कि ईरान से।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर श्री रजाई ने कहा कि ईरान इस जलमार्ग के प्रबंधन के लिए ओमान के साथ समझौते की घोषणा के ‘बेहद करीब’ पहुंच गया था, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि समझौते को सार्वजनिक करने से पहले क्षेत्रीय समर्थन की आवश्यकता हो सकती है।

श्री रजाई ने यह भी कहा कि ईरान नये सिरे से संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार है और उन्होंने दावा किया कि पिछली लड़ाई के बाद से उसने अपनी सैन्य क्षमताओं को और बढ़ाया है। उन्होंने कहा, “हमने खुद को निर्णायक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया है और अमेरिका की सैन्य कमजोरियां हमें अच्छी तरह पता हैं। इस बार हमारी तैयारी पहले से कहीं बेहतर है।” उन्होंने कहा, “इसलिए हम पूरी तरह तैयार हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू की तो ईरान अधिक शक्तिशाली और दर्दनाक हमले से जवाब देगा।

श्री रजाई ने कहा कि पड़ोसी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों का लक्ष्य उन देशों की भूमि नहीं, बल्कि अमेरिकी संपत्ति थी। उन्होंने क्षेत्रीय देशों से ईरान के खिलाफ अमेरिका के आर्थिक अभियान में शामिल न होने का आग्रह किया।

 

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