कोच्चि, 20 सितंबर (वार्ता) भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (आईसीएआई) चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से जुड़े कानून और नियमों में बदलाव चाहता है और इसके लिए वह सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है।
आईसीएआई की केंद्रीय परिषद के सदस्य सतीश कुमार गुप्ता ने शनिवार शाम यहां बताया कि साल 1949 में संस्थान की स्थापना के बाद से पहली बाद परिषद चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एक्ट, नियम और शिड्यूल में बदलाव पर विचार कर रहा है। इसमें कई तरह के बदलाव सुझाए गए हैं।
मीडिया से एक मुलाकात के दौरान उन्होंने बताया कि आईसीएआई इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है और जल्द ही ठोस परिणाम देखने को मिलेंगे। आईसीएआई की संबंधित समिति दो महीने के भीतर अंतिम प्रारूप तैयार कर परिषद के पास भेज देगी। परिषद से मंजूरी मिलने के बाद उसे कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। मंत्रालय उसमें बदलावों के साथ सरकार के पास भेजेगा। फिर अंतिम प्रारूप मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद संसद के समक्ष आएगा।
उदाहरण देते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि आईसीएआई का मानना है कि यदि कोई सदस्य कंसल्टेंसी का काम कर रहा है तो उसे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) पर लागू होने वाले कठोरतम नियमों के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए, उसके लिए वैसे ही नियम होने चाहिए जैसे दूसरे पेशों के कंसल्टेंट के लिए होते हैं। कड़े कानून सिर्फ उन्हीं के लिए लागू होने चाहिए जो ऑडिट का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि साथ ही साथ कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ भी विचार-विमर्श चल रहा है और उनकी प्रतिक्रिया काफी सकारात्मक है।
इसके अलावा आईसीए नेटवर्किंग संबंधी दिशा-निर्देशों में भी बदलाव पर में भी बदलाव पर भी काम चल रहा है। अभी किसी सीए फर्म को दूसरे पेशे के फर्म के साथ नेटवर्किंग की अनुमति नहीं है। दिशा-निर्देशों में बदलाव के बाद यह संभव हो सकेगा। इस मुद्दे पर आईसीएआई की समिति में चर्चा हो चुकी है। इसके बाद इसे समिति के पास रखा जाएगा और फिर सरकार उस पर फैसला लेगी।
