
रतलाम। जिले में नियम विरुद्ध संचालित यात्री वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग और पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाते हुए स्लीपर कोच बसों की जांच की। इस दौरान छत पर लगेज केरियर लगाकर चल रही बसों पर विशेष फोकस किया गया। जांच में कई सुरक्षा खामियां सामने आने के बाद 5 यात्री वाहनों के खिलाफ चालानी कार्रवाई करते हुए कुल 41,950 का समन शुल्क वसूला गया। जिला परिवहन अधिकारी जगदीश बिल्लौरे ने बताया कि अभियान के दौरान कुल 24 स्लीपर कोच बसों की जांच की गई। जिन वाहनों में मोटरयान अधिनियम के नियमों का उल्लंघन पाया गया, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
आपातकालीन दरवाजे और खिड़कियों की स्थिति: जैसे बिंदुओं को भी देखा गया। अधिकारियों ने पाया कि कई बसों में इमरजेंसी एग्जिट के पास अतिरिक्त सीटें लगा दी जाती हैं, जिससे दुर्घटना के समय यात्रियों के बाहर निकलने में दिक्कत हो सकती है।
आखिर परेशानी क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार स्लीपर कोच बसों की छत पर लगेज केरियर लगाने से वाहन का संतुलन प्रभावित होता है। अधिक वजन होने पर तेज रफ्तार या मोड़ के दौरान बस के पलटने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार बस ऑपरेटर क्षमता से अधिक सामान भी ऊपर रख देते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है।
इसके अलावा कई निजी बस संचालक बिना अनुमति वाहन की बॉडी में बदलाव कर लेते हैं। लगेज केरियर लगाना भी कई मामलों में अनुमोदित डिजाइन के विपरीत माना जाता है। परिवहन विभाग का कहना है कि ऐसे बदलाव सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हैं।
विभाग ने क्या निर्देश दिए?
परिवहन विभाग ने बस संचालकों और चालकों को निर्देश दिए हैं कि वे वाहनों से लगेज केरियर हटाकर परिवहन कार्यालय से सत्यापन करवाएं। साथ ही सभी जरूरी दस्तावेज वैध अवस्था में रखने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और नियम विरुद्ध संचालित वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग एवं पुलिस की संयुक्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
जांच में किन कमियों पर फोकस?
संयुक्त चेकिंग के दौरान अधिकारियों ने केवल लगेज केरियर ही नहीं, बल्कि अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी जांच की। इनमें— वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र, वैध परमिट, पीयूसी प्रमाण पत्र, बीमा, ड्राइविंग लाइसेंस आदि।
