अस्पताल की चौखट पर प्रसव, जांच से पहले ही क्लीन चिट 

खंडवा। दो दिन पहले मेडिकल कॉलेज सह जिला चिकित्सालय खंडवा में एक प्रसूता महिला ने अस्पताल के बरामदे में ही बच्चे को जन्म दे दिया। जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही और प्रबंधन की कमजोरियों के चलते पिछले एक महीने में कई बच्चों की मौतें हो चुकी हैं। कई वरिष्ठ चिकित्सक सरकारी अस्पताल की जिम्मेदारी जूनियर डॉक्टरों पर छोड़कर निजी प्रैक्टिस में व्यस्त रहते हैं। वहीं, अधिकारियों पर भी इन घटनाओं को दबाने के आरोप लग रहे हैं।

घटना के बाद जब मामला मीडिया में उजागर हुआ, तो कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए और जिला पंचायत सीईओ डॉ. नागार्जुन गौड़ा को अस्पताल भेजा। लेकिन जांच शुरू होने से पहले ही डॉ. गौड़ा ने अस्पताल प्रशासन का बचाव करते हुए बयान दे दिया कि महिला को प्रसव से पूर्व टहलने के लिए कहा गया था, इसी दौरान बरामदे में प्रसव हो गया।

इस बयान ने प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जांच टीम गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी गई है, वहीं दूसरी ओर पहले ही क्लीन चिट जैसी टिप्पणी से जांच की निष्पक्षता पर संदेह गहराया है।

डॉ. गौड़ा ने बताया कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और मेडिकल कॉलेज डीन एवं सिविल सर्जन को विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बनाकर तीन दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

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