फिल्म इंडस्ट्री में बड़े सितारों के बच्चों से अक्सर यही उम्मीद की जाती है कि वे अपने माता-पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए एक्टिंग की दुनिया में कदम रखेंगे। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बने-बनाये रास्तों पर चलने के बजाय अपनी अलग पहचान बनाना पसंद करते हैं। ऐसी ही एक कहानी भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में शुमार रजनीकांत की छोटी बेटी सौंदर्या रजनीकांत की भी है।
चकाचौंध की दुनिया से अलग चुना रास्ता
ग्लैमर और स्टारडम से घिरे माहौल में पली-बढ़ी होने के बावजूद सौंदर्या ने कभी कैमरे के सामने आना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने एक्टिंग की चकाचौंध से दूर रहकर रचनात्मकता के एक नए क्षेत्र को चुना। अपने करियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने एक ग्राफिक डिजाइनर के रूप में काम करना शुरू किया, जहां उन्होंने अपनी कलात्मक प्रतिभा का लोहा मनवाया।
शुरुआती दौर में फिल्मों में दिया अहम योगदान
ग्राफिक डिजाइनिंग के क्षेत्र में कदम रखने के बाद सौंदर्या ने कई बड़ी तमिल फिल्मों के लिए टाइटल डिजाइनिंग और विजुअल इफेक्ट्स का काम किया। उन्होंने अपने काम के जरिए बड़े पर्दे पर सीन्स को एक नया रूप दिया। इस दौरान उन्होंने कई पॉपुलर फिल्मों में अपना अहम योगदान दिया और इंडस्ट्री में एक कुशल तकनीशियन के तौर पर अपनी पहचान स्थापित की।
जब पहली बार संभाली फिल्म डायरेक्शन की कमान
तकनीकी क्षेत्र में खुद को साबित करने के बाद सौंदर्या ने डायरेक्शन की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने साल 2014 में अपने पिता सुपरस्टार रजनीकांत को लेकर भारत की पहली मोशन कैप्चर 3डी एनीमेशन फिल्म ‘कोचादइयां’ का डायरेक्शन किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने भारतीय सिनेमा में तकनीक के इस्तेमाल को एक नई दिशा दी और एक निर्देशक के रूप में उनके साहस को दर्शाया।
कैमरे के पीछे रहकर बनाई अलग पहचान
इसके बाद भी सौंदर्या ने फिल्म प्रोडक्शन और डायरेक्शन के क्षेत्र में अपना काम जारी रखा। उन्होंने ‘वेलैइल्ला पट्टाधारी 2’ (VIP 2) जैसी व्यावसायिक रूप से सफल फिल्म का डायरेक्शन भी किया, जिसमें अभिनेता धनुष और अभिनेत्री काजोल अहम भूमिकाओं में थे। स्टार किड होने के बावजूद उन्होंने एक्टिंग से दूरी बनाकर पर्दे के पीछे रहकर काम करने को प्राथमिकता दी और अपनी मेहनत से अपनी एक अलग पहचान बनाई।
