ढाका, 19 सितंबर (वार्ता) बंगलादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपनी अवामी लीग पार्टी की ऑनलाइन बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वह स्वदेश लौटना चाहती हैं, लेकिन बंगलादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार उनकी वापसी में बाधा उत्पन्न कर कर रही है।
अवामी लीग पार्टी की ओर से जारी बयान में बताया गया कि सुश्री हसीना ने कहा, “मैं देश लौटने के लिए उत्सुक हूं, लेकिन सरकार बाधाएं पैदा कर रही है।” उन्होंने कहा कि देश की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है और हर क्षेत्र तबाह होने के कगार पर है। उन्होंने मौजूदा स्थिति से देश को बचाने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सुश्री हसीना ने कहा कि उन्होंने जमीनी स्थिति और अवामी लीग के संगठन की स्थिति का आकलन करने के लिए पार्टी की 83 जिला शाखाओं और 160 निर्वाचन क्षेत्रों के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के साथ विचार-विमर्श किया है।
पार्टी के अनुसार, बंगलादेश अवामी लीग की केंद्रीय कार्यकारी समिति की बैठकअध्यक्ष-मंडली सदस्य शेख फजलुल करीम सेलिम की अध्यक्षता में ऑनलाइन हुई, जिसमें पार्टी अध्यक्ष शेख हसीना ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया।
सुश्री हसीना ने संगठनात्मक मामलों के लिए जिम्मेदार पार्टी नेताओं को नेतृत्व के रिक्त पदों को भरते समय उन लोगों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया, जिन्हें कथित तौर पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि अवामी लीग की ताकत जनता तथा जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और नेताओं में बनी हुई है।
उन्होंने पिछले दो वर्षों में कथित उत्पीड़न और दमन का सामना करने वाले लोगों की राजनीतिक संबद्धता से परे जानकारी जुटाने और इसके लिए कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों की पहचान तथा उनके कृत्यों को सार्वजनिक करने का भी आह्वान किया। उन्होंने उन सैन्य और असैन्य अधिकारियों की रिहाई की भी मांग की, जिन्हें उनके अनुसार झूठे मामलों में गिरफ्तार किया गया है।
सुश्री हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि कानून प्रवर्तन कर्मियों ने लोगों के जीवन और संपत्ति की रक्षा करने का प्रयास किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कई पुलिसकर्मी मारे गये, उनके शव जला दिये गये तथा पुलिस थानों में लूटपाट के बाद आग लगा दी गयी। उन्होंने इन हत्याओं की न्यायिक जांच की मांग की। देश में अब अंधाधुंध हत्याएं, बलात्कार, लूटपाट, जबरन वसूली और मामले दर्ज किये जाने की घटनाएं हो रही हैं तथा सरकार पर ऐसी गतिविधियों की अनुमति देने का आरोप लगाया।
पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्पीड़न और मृत्युदंड का सामना करने के बावजूद उन्हें जनता के साथ खड़े रहना चाहिए और उनके साथ मिलकर प्रतिरोध खड़ा करना चाहिए।
बैठक का संचालन अवामी लीग के मुक्ति संग्राम मामलों के सचिव एवं अधिवक्ता मृणाल कांति दास ने किया। अवामी लीग के अनुसार बैठक में महासचिव ओबैदुल कादेर,अध्यक्ष-मंडली सदस्य मोजफ्फर हुसैन चौधरी माया और जहांगीर कबीर नानक, संयुक्त महासचिव एएफएम बहाउद्दीन नसीम, संगठन सचिव एसएम कमाल हुसैन और सुजीत रॉय नंदी, पार्टी सदस्य मोहम्मद अली अराफात तथा उप सचिव रेमंड एरेंग ने भी विचार व्यक्त किए।
पार्टी नेताओं ने हसीना और अवामी लीग के अन्य नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर अवैध अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा सुनायी गयी मृत्युदंड की सजा रद्द करने तथा न्यायाधिकरण को ही समाप्त करने की मांग की।
पार्टी के बयान के अनुसार, बैठक में देश की राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की गयी। इसमें लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव, तेल, गैस, पानी और बिजली की कमी तथा इनसे जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताओं, कानून-व्यवस्था की स्थिति और आर्थिक गतिरोध पर भी चर्चा की गयी।
अवामी लीग ने हसीना और पार्टी के कई बड़े नेताओं के खिलाफ हाल ही में आये न्यायाधिकरण के फैसलों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया और कहा कि न्यायाधिकरण का कोई कानूनी आधार नहीं था। बयान में ओबैदुल कादर, एएफएम बहाउद्दीन नसीम, असदुज्जमां खान कमाल, मोहम्मद अली अराफात, शेख फजले शम्स पराश, मैनुल हुसैन खान निखिल, सद्दाम हुसैन और शेख वली आसिफ एनान को सजा पाने वालों में शामिल किया गया।
चर्चा के बाद, समिति ने कई मांगें मानीं, जिनमें ज़रूरी चीज़ों की कीमतों में कमी, बिजली, तेल, गैस और उर्वरक की बिना रुकावट आपूर्ति, नौकरी गंवा चुके वर्कर्स के लिए नौकरी के उपाय; बंद फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रीज़ को फिर से खोलना; और पॉलिटिकल कैदियों की रिहाई शामिल हैं। पार्टी ने कहा कि जिन मामलों को वह झूठा मानती है, उन्हें वापस लिया जाये, अवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाया जाये, जिसे वह गैर-कानूनी ट्रिब्यूनल और उसकी मौत की सज़ा कहती है, उसे खत्म किया जाये, और जिन सैन्य और नागरिक अधिकारियों को वह बेगुनाह मानती है, उनके खिलाफ मामले वापस लिए जायें, साथ ही जिन्हें गिरफ्तार किया गया है, उन्हें रिहा किया जाये।
