भारत जैसे देशों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है एआई : डॉ. एंथनी चांग

नयी दिल्ली, 19 सितंबर (वार्ता) दक्षिण कैलिफोर्निया के एआई विशेषज्ञ और चिकित्सक डॉ. एंथनी चांग ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, मरीजों की प्राथमिकता तय करने, जांच की गति और सटीकता सुधारने तथा पुरानी बीमारियों के प्रबंधन में मदद कर सकती है।

डॉ. चांग ने शनिवार को यहां “डॉक्टर्स ए आई वैश्विक सम्मेलन,2026,,सटीकता, सहभागिता,संभावना, चिकित्सा में एआई का नया दौर” पर दो दिवसीय सम्मेलन में यूनीवार्ता से बातचीत में कहा कि एआई कई तरीकों से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बना सकता है। उन्होंने कहा कि बीमारी के शुरुआती चरण में मरीज के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ तस्वीरों और वीडियो के जरिए बीमारी का निदान करने में भी एआई मदद कर सकता है, खासकर तब जब किसी विशेष क्षेत्र के विशेषज्ञ की आसानी से उपलब्धता न हो। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों की देखभाल के समन्वय को भी एआई की मदद से आसान बनाया जा सकता है। भविष्य में एआई एजेंटों के इस्तेमाल से पुरानी बीमारियों के प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।

भारत जैसे अधिक आबादी वाले देश में स्वास्थ्य क्षेत्र को बेहतर बनाने में एआई की भूमिका पर उन्होंने कहा कि यहां मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। ऐसे में एआई उन मरीजों की प्राथमिकता तय करने में मदद कर सकता है, जिन्हें जल्द चिकित्सकीय परामर्श की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एआई प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में मरीज के डॉक्टर के पास पहुंचने से पहले किये जाने वाले कई काम भी कर सकता है। इससे डॉक्टर सीधे मरीज की मुख्य समस्या या उस बीमारी पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे, जिसका तत्काल उपचार जरूरी है।

डॉ. चांग ने भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के तत्काल इस्तेमाल के पांच प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहला क्षेत्र जांच की गति और सटीकता बढ़ाना है। इसमें एक्स-रे और तपेदिक (टीबी) की जांच शामिल है। दूसरा क्षेत्र डॉक्टरों को मरीजों को अधिक तेजी और प्रभावी ढंग से देखने में सक्षम बनाना है। मरीज के आने से पहले किये जाने वाले जरूरी काम एआई के माध्यम से पूरे किये जा सकते हैं। तीसरे क्षेत्र के रूप में उन्होंने भविष्य में एआई एजेंटों की मदद से पुरानी बीमारियों के प्रबंधन के समन्वय का उल्लेख किया। चौथे क्षेत्र में प्रशिक्षुओं और स्वास्थ्यकर्मियों को सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में शिक्षित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जानकारी केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि अन्य लोगों तक भी पहुंचनी चाहिए।

उन्होंने पांचवें क्षेत्र के रूप में सार्वजनिक स्वास्थ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि एआई का इस्तेमाल बीमारी की निगरानी और संक्रामक बीमारियों को तेजी से नियंत्रित करने के उपाय तलाशने में किया जा सकता है।

दुनियाभर के डॉक्टरों के लिए एआई से जुड़े संदेश के बारे में डॉ. चांग ने कहा कि डॉक्टरों को खुद को एआई के बारे में शिक्षित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के लिए एआई में पूरी तरह दक्ष होना जरूरी नहीं है, लेकिन उन्हें एआई की बुनियादी समझ और जानकारी जरूर होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारतीय डॉक्टरों के लिए यह जरूरत और भी अधिक है। उनके अनुसार, भारतीय डॉक्टर एआई में काफी रुचि रखते हैं, लेकिन उनके पास इसे सीखने के पर्याप्त अवसर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। डॉ. चांग ने कहा कि अमेरिका में डॉक्टरों के बीच एआई से अपनी जगह लिये जाने को लेकर चिंता है, जबकि भारत जैसे देश में एआई की जरूरत और भी अधिक है।

उन्होंने कहा कि एआई सीखना लोगों को और अधिक मानवीय बनाता है, क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलती है कि वास्तव में कौन-से काम विशिष्ट रूप से मानवीय हैं। उन्होंने कहा, “अगर आप एआई नहीं सीखते हैं, तो इस बात को लेकर भ्रम बना रहता है कि मानवीयता क्या है। इसलिए एआई आपको और अधिक मानवीय बनाता है।”

डॉ. चांग ने कहा कि आम तौर पर माना जाता है कि एआई इंसानों को कम मानवीय बनाएगा, लेकिन उनके अनुसार एआई और मानव क्षमताओं के बीच अंतर को समझने पर इसका उलटा प्रभाव हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब लोग कहते हैं कि एआई में सहानुभूति नहीं हो सकती, तो वह इसका उदाहरण देते हैं कि मौजूदा एआई मॉडल कभी-कभी व्यस्त डॉक्टर से अधिक सहानुभूति प्रदर्शित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के पास मरीजों की बड़ी संख्या के कारण पर्याप्त समय नहीं होता और इस वजह से मरीज को पर्याप्त सहानुभूति नहीं मिल पाती।

उन्होंने कहा कि एआई के इस्तेमाल से यह अंतर अधिक स्पष्ट हो सकता है कि कौन-से काम एआई कर सकता है और कौन-से काम विशिष्ट रूप से मानवीय हैं। डॉ. चांग ने कहा, “आज डॉक्टर ऐसे बहुत से काम करते हैं, जो कंप्यूटर कर सकते हैं। लेकिन सिर्फ इसलिए कि आप कोई काम करते हैं, वह मानवीय काम नहीं हो जाता।”

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