नई दिल्ली | वैश्विक सुरक्षा संस्था बायोकैच की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत का बैंकिंग सेक्टर डिजिटल धोखाधड़ी के गंभीर संकट का सामना कर रहा है। देश के लगभग 48 फीसदी बैंक साइबर ठगी से सीधे तौर पर प्रभावित हैं। इस धोखाधड़ी के कारण भारतीय बैंकों को सालाना 830 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हो रहा है, जबकि आम ग्राहकों को भी प्रतिवर्ष 41 करोड़ रुपये से अधिक का व्यक्तिगत नुकसान उठाना पड़ रहा है।
UPI और AI बने धोखाधड़ी के नए हथियार
अध्ययन में शामिल 66 फीसदी बैंकिंग लीडर्स ने माना है कि UPI प्रणाली धोखाधड़ी का मुख्य जरिया बन गई है। इसकी त्वरित भुगतान सुविधा का फायदा उठाकर साइबर ठग आसानी से अपना निशाना बना रहे हैं। साथ ही, 93 फीसदी भारतीयों का मानना है कि AI तकनीक के इस्तेमाल से स्कैम के तरीके और भी जटिल हो गए हैं, जिससे धोखाधड़ी को पकड़ना पहले के मुकाबले बेहद मुश्किल हो गया है।
बढ़ते वित्तीय नुकसान पर विशेषज्ञों की चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, 84 फीसदी भारतीय बैंकिंग विशेषज्ञों ने स्वीकार किया है कि उनके संस्थानों में फ्रॉड से होने वाला वित्तीय नुकसान वैश्विक औसत से काफी अधिक है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष स्थिति अधिक चिंताजनक हुई है। बायोकैच के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डिजिटल बातचीत में AI एजेंटों की बढ़ती भागीदारी भविष्य में और भी नए और खतरनाक साइबर खतरों को जन्म देगी, जिनसे निपटने के लिए कड़े सुरक्षा उपायों की तत्काल आवश्यकता है।

