
नई दिल्ली, विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक, 2026 की समीक्षा के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी की पहली बैठक शुक्रवार को भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल की अध्यक्षता में संसद भवन में संपन्न हुई.डॉ. जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में विधेयक के तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई. इस 31 सदस्यीय समिति में संसद के दोनों सदनों का प्रतिनिधित्व है, जिसमें 21 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से शामिल हैं. बैठक के दौरान गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को प्रस्तावित विधेयक के विभिन्न प्रावधानों और संशोधनों की रूपरेखा पर विस्तृत जानकारी दी. अधिकारियों ने सदस्यों को आश्वस्त करने का प्रयास किया कि इस विधेयक का उद्देश्य किसी विशिष्ट समुदाय या धर्म को लक्षित करना नहीं है, बल्कि इसका एकमात्र मकसद विदेशी चंदे के प्रबंधन में वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना और प्रशासनिक खामियों को दूर करना है.
इस बैठक से ठीक पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान और नेशनल पीपुल्स पार्टी यानी एनपीपी के जेम्स पांगसांग कोंगकल संगमा को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में नामित किया है.
सूत्रों की मानें तो बैठक में मौजूद विपक्षी सदस्यों ने विधेयक के कठोर प्रावधानों पर अपनी गंभीर आपत्तियां दोहराईं. विपक्ष का मुख्य विरोध उस प्रस्तावित नियम को लेकर है, जिसके तहत सरकार द्वारा नियुक्त नामित प्राधिकरण को बिना किसी पूर्व न्यायिक अनुमति या अदालती आदेश के एनजीओ की संपत्तियों, जैसे स्कूल, अस्पताल और शोध संस्थानों को अपने नियंत्रण में लेने या उन्हें बेचने का असीमित अधिकार मिल जाएगा. विपक्ष का दावा है कि इस शक्ति का दुरुपयोग आदिवासी और दूरदराज के इलाकों में काम करने वाली ईसाई मिशनरियों और अन्य अल्पसंख्यक धर्मार्थ संस्थाओं के खिलाफ किया जा सकता है. ऐसे में इस पहली चर्चा के बाद अब समिति विधेयक के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने के लिए नागरिक समाज के प्रतिनिधियों, कानूनी विशेषज्ञों और प्रभावित एनजीओ के सुझावों को आमंत्रित करने की योजना बना रही है. जेपीसी को विभिन्न पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श करने के बाद आगामी शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह तक अपनी अंतिम रिपोर्ट संसद को सौंपनी है.
