ढाका, 17 अगस्त (वार्ता) अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) के मुख्य अभियोजक मोहम्मद अमीनुल इस्लाम ने आज कहा कि 2024 में सत्ता से हटाये जाने के बाद से भारत में रह रहीं बेदखल पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मौजूदा स्थिति के बारे में बंगलादेश के पास कोई विशिष्ट जानकारी नहीं है।
श्री अमीनुल इस्लाम ने सुबह पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि बंगलादेश ने भारत सरकार से हसीना को प्रत्यर्पित करने का औपचारिक अनुरोध पहले ही कर दिया था और उन्हें वापस लाने के लिए जरूरी कानूनी कदम उठाये गये थे।
पूर्व प्रधानमंत्री की अपने देश वापसी के लिए अदालत की मंजूरी की आवश्यकता से जुड़ी भारतीय मीडिया की रिपोर्ट के संबंध में आईसीटी के मुख्य अभियोजक ने कहा कि इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि वह राजनीतिक शरण के तहत भारत में हैं या उनकी सटीक कानूनी स्थिति क्या है।
श्री अमीनुल इस्लाम ने कहा, “इसलिए उस रिपोर्ट के आधार पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।”
श्री अमीनुल के बयान से पहले ढाका ने रविवार को भारत से अपने प्रत्यर्पण अनुरोध पर “त्वरित कार्रवाई करने” और बंगलादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत की द्विपक्षीय यात्रा के लिए ‘अनुकूल माहौल’ बनाने में मदद करने का आग्रह किया था।
बंगलादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एकेएम शाहिदुल करीम ने रविवार को कहा, “हमारा मानना है कि यात्रा के लिए अनुकूल माहौल बनाने की आवश्यकता है।”
उन्होंने कहा कि श्री तारिक रहमान की भारत की संभावित द्विपक्षीय यात्रा को लेकर दोनों देशों के अधिकारी कई हफ्तों से संपर्क में हैं।
श्री करीम ने कहा कि पांच अगस्त को नयी दिल्ली में शेख हसीना की खुली प्रेस वार्ता से यह प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने इस बात पर ध्यान दिलाया कि आईसीटी ने उन पर मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप लगाये हैं और उन्हें मृत्युदंड की सजा तक सुनायी है।
उन्होंने कहा, “हमने इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।”
बंगलादेश ने भारतीय अधिकारियों से द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के अनुसार, श्रीमती शेख हसीना के साथ-साथ उन अन्य हस्तियों के प्रत्यर्पण में तेजी लाने को भी कहा है, जिन्हें उसने भगोड़ा घोषित किया है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन पर बंगलादेश ने भारत-विरोधी संगठन ‘इंकलाब मंच’ के दिवंगत नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या का आरोप लगाया है।
प्रवक्ता ने कहा, “हम उनके जवाब का इंतजार कर रहे हैं।”
बंगलादेश ने दोहराया कि वह संप्रभु समानता, राष्ट्रीय गरिमा, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप और पारस्परिक लाभ के आधार पर अपने पड़ोसियों सहित अन्य देशों के साथ मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंध विकसित करने में अपनी ‘बंगलादेश प्रथम’ नीति का पालन करना जारी रखेगा।
