नयी दिल्ली, 02 अक्टूबर (वार्ता) एशियाई खेलों में अपने चयन को लेकर कानूनी लड़ाई के तीन साल बाद, सुजीत कलकल ने एशियाई खेलों का चैंपियन बनकर एक शानदार सफर पूरा किया। उन्होंने पुरुषों की फ्रीस्टाइल 65 किग्रा फ़ाइनल में ताजिकिस्तान के वर्ल्ड मेडलिस्ट अब्दुलमजीद कुदिएव को 10-9 से हराकर ज़बरदस्त वापसी की।
मैच खत्म होने में दो मिनट से भी कम समय बचा था और सुजीत 2-9 से पीछे चल रहे थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 23 साल के सुजीत ने लगातार हमले किए और तेज़ी से तीन ‘टेकडाउन’ करके अंकों का अंतर कम किया। जब 11 सेकंड बचे थे, तब भी कुदिएव एक अंक से आगे थे, लेकिन सुजीत ने एक आखिरी ‘टेकडाउन’ हासिल कर लिया। इन दो अंकों ने उन्हें 10-9 से आगे कर दिया और खेलों की सबसे रोमांचक वापसी में से एक को पूरा किया।
यह 2018 के बाद एशियाई खेलों में कुश्ती में भारत का पहला गोल्ड मेडल था। सुजीत पुरुषों की 65 किग्रा फ्रीस्टाइल का खिताब जीतने वाले तीसरे भारतीय बन गए; उनसे पहले ओलंपिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त (2014) और बजरंग पूनिया (2018) ने यह खिताब जीता था।
इस जीत के साथ ही उस सफर का सुखद अंत हुआ, जिसकी शुरुआत तीन साल पहले निराशा के साथ हुई थी।
सुजीत ने 2022 के एशियाई खेलों (जो आखिरकार 2023 में हुए) के लिए 65 किग्रा कैटेगरी में ट्रायल की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। खेल मंत्रालय द्वारा रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की मान्यता रद्द किए जाने के बाद भारतीय कुश्ती का कामकाज देख रही एड-हॉक कमेटी ने बजरंग पूनिया को सीधे टीम में एंट्री दे दी थी।
सुजीत ने महिला पहलवान अंतिम पंघाल के साथ मिलकर इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी। अंतिम आखिरकार टीम में जगह बनाने और ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रहीं, जबकि विनेश फोगाट को बिना ट्रायल के 53 किग्रा कैटेगरी में सीधे एंट्री दी गई। हालांकि, सुजीत को कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली।
किस्मत का खेल देखिए, तीन साल पहले बजरंग हार गए थे, जिससे 65 किग्रा कैटेगरी में भारत का दबदबा खत्म हो गया था। बजरंग के 2018 में गोल्ड जीतने से पहले योगेश्वर ने 2014 में गोल्ड मेडल जीता था।
