
उज्जैन.धार्मिक नगरी उज्जैन में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखा गया। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में शिप्रा नदी के पावन तटों और श्री महाकाल महालोक परिसर में 33 लाख मिट्टी के दीये एक साथ प्रज्वलित किए । इस अद्भुत और अलौकिक दृश्य को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु अवंतिका नगरी पहुंचे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मंशा अनुसार यह कार्यक्रम किया गया जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नबीन भी पहुंचे.
हेलीपैड पर सांस्कृतिक छटा और अतिथियों का आगमन
इस ऐतिहासिक दीपोत्सव के साक्षी बनने के लिए कई वीआईपी और राजनेता उज्जैन पहुंचे। जैसे ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा के राष्ट्रीय अध्य्क्ष नितिन नबीन, और भाजपा प्रदेश अध्य्क्ष हेमंत खंडेलवाल हेलीपैड पर उतरे, वहां उनका भव्य स्वागत किया गया। अतिथियों के स्वागत में स्थानीय कलाकारों ने डमरू वादन, शंखनाद और पारंपरिक लोक नृत्य की बेहद ऊर्जावान और मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिसने उत्सव की शुरुआत में ही समां बांध दिया।
रामघाट पर महाआरती और पहला दीप
हेलीपैड से सीधे अतिथि शिप्रा नदी के मुख्य घाट रामघाट पहुंचे। शाम ठीक 7 बजे मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच मां शिप्रा की भव्य महाआरती की गई। इसके तुरंत बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने पहला ‘आशीर्वाद का दीप’ प्रज्वलित कर महा-दीपोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया।
महज 3 मिनट में जगमगाए घाट
उज्जैन जिला प्रशासन और वॉलंटियर्स के सटीक समन्वय के कारण यह पूरा आयोजन इंजीनियरिंग और प्रबंधन की एक अनूठी मिसाल बन गया। घाटों पर दीप जलाने के लिए लगभग 25,000 से अधिक स्वयंसेवक तैनात किए गए थे। पूरे घाट क्षेत्र को 7 प्रमुख सेक्टर्स और 250 सब-सेक्टर्स में विभाजित किया गया था। हर स्वयंसेवक ने बिजली की गति से काम करते हुए औसतन डेढ़ सेकंड में एक दीया जलाया। नतीजतन, पूरा शिप्रा तट महज 3 मिनट के भीतर 33 लाख दीयों की सुनहरी रोशनी से नहा उठा। रामघाट के साथ-साथ दत्त अखाड़ा घाट, केदारेश्वर घाट, सुनहरी घाट और भव्य श्री महाकाल महालोक परिसर भी दीपों की श्रृंखला से जगमगा उठा।
गीत, संगीत, भजन और आसमान में सतरंगी आतिशबाजी
दीपों के प्रज्वलित होते ही शिप्रा तट का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। प्रसिद्ध भजन गायकों और सांस्कृतिक दलों द्वारा शिव भजनों और देशभक्ति गीतों की मधुर प्रस्तुतियां दी गईं। दीपों की जमीनी रोशनी के बीच आसमान में की गई भव्य आतिशबाजी ने इस नजारे को और भी चमत्कारी बना दिया। घाटों पर मौजूद हजारों लोगों ने ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष किए।
पीएम मोदी का सेवा काल
इस अवसर पर संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में दीप जलाना अंधकार पर प्रकाश की विजय और लोक-कल्याण की प्रार्थना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह दीपोत्सव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्पित सार्वजनिक सेवा जीवन के प्रति मध्य प्रदेश की जनता की ओर से आभार प्रकट करने का एक माध्यम है। यह ‘आशीर्वाद का दीया’ देश की समृद्धि और पीएम मोदी की दीर्घायु की कामना के लिए जलाया गया है।
‘जीरो-वेस्ट’ और थ्री-लेयर सुरक्षा
इतने बड़े पैमाने पर आयोजित इस कार्यक्रम को सुचारू रूप से चलाने के लिए उज्जैन पुलिस प्रशासन और नगर निगम की टीमें हफ्तों से दिन-रात जुटी हुई थीं। वीआईपी मूवमेंट और भारी जनसैलाब को देखते हुए शहर में थ्री-लेयर सुरक्षा घेरा तैयार किया गया था। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही थी। उज्जैन नगर निगम ने पर्यावरण का ख्याल रखते हुए इसे ‘कचरा मुक्त आयोजन’ घोषित किया था। दीपोत्सव के संपन्न होते ही नगर निगम की विशेष स्वच्छता टीमों ने घाटों से खाली दीयों और बचे हुए तेल-कपूर को हटाने का सफाई अभियान तुरंत शुरू कर दिया ताकि शिप्रा नदी का आंचल स्वच्छ बना रहे। यह ऐतिहासिक दीपोत्सव न केवल उज्जैन के सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक बना, बल्कि इसने आधुनिक प्रबंधन और जनभागीदारी की एक नई मिसाल पेश की है।
