
नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सदस्य देशों से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच शांतिदूत की भूमिका निभाने का आग्रह किया। समाचार एजेंसी एएनआई ने रॉयटर्स के हवाले से बताया कि शी ने कहा, मध्य पूर्व का यह संघर्ष अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के अनुरूप नहीं है, और चीन इस दिशा में अन्य ब्रिक्स सदस्यों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। सरकारी चैनल CCTV ने शी के हवाले से यह जानकारी दी।
ब्रिक्स को बताया ‘ग्लोबल साउथ’ का अग्रणी समूह
अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने ब्रिक्स को उभरते और विकासशील देशों के बीच आत्मनिर्भरता के एक मॉडल के रूप में पेश किया और कहा कि यह समूह ग्लोबल साउथ में अग्रणी भूमिका निभाता है, जिसे इनोवेशन-आधारित विकास को आगे बढ़ाना चाहिए।
2027 में चीन के पास होगी ब्रिक्स की अध्यक्षता
चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2027 में ब्रिक्स की रोटेटिंग प्रेसीडेंसी चीन के पास आएगी। इस दौरान चीन बहुपक्षवाद के जरिए समूह की एकजुटता को और मजबूत बनाने पर काम करेगा। साथ ही सहयोग मंचों के माध्यम से सदस्य देशों की विकास रणनीतियों में बेहतर तालमेल बिठाने और ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव, ग्लोबल सिक्योरिटी इनिशिएटिव, ग्लोबल सिविलाइजेशन इनिशिएटिव तथा ग्लोबल गवर्नेंस इनिशिएटिव के जरिए साझा विकास को गति देने की कोशिश की जाएगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, ग्रीन डेवलपमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गरीबी उन्मूलन और कृषि विकास जैसे क्षेत्रों में और बेहतर परिणाम हासिल करने पर जोर रहेगा।
गौरतलब है कि इसी शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ग्लोबल साउथ के देशों की चिंताओं को उठाते हुए 10-सूत्रीय ब्रिक्स सुधार रोडमैप तैयार करने का प्रस्ताव रखा था।
