एआई के दौर में बदलनी होगी उच्च शिक्षा की दिशा

इंदौर. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में उच्च शिक्षण संस्थानों को पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धति में बदलाव करना होगा. विद्यार्थियों को डिग्री के साथ व्यावहारिक कौशल और रोजगारपरक दक्षता से लैस करना जरूरी है. यह बात डीएवीवी के स्कूल ऑफ कॉमर्स और एसीसीए की ओर से आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कही.

‘फ्यूचर-रेडी इंस्टीट्यूशंसः रीइमैजिनिंग हायर एजुकेशन फॉर द नेक्स्ट डिकेड’ विषय पर हुई कार्यशाला में शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों और कॉलेजों के प्राचार्य व विभागाध्यक्षों ने भाग लिया. डीएवीवी के रजिस्ट्रार प्रज्वल खरे ने कहा कि वैश्विक दृष्टिकोण, लचीले पाठ्यक्रम, आलोचनात्मक सोच और रोजगारपरक शिक्षा पर जोर देना होगा. भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की जरूरत भी उन्होंने बताई. स्कूल ऑफ कॉमर्स के प्रमुख प्रो. (डॉ.) सुरेश पाटीदार ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उद्योग के बीच कौशल का अंतर बड़ी चुनौती है. संस्थानों को एआई को लेकर जल्दबाजी के बजाय उसके प्रभाव को समझकर जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम में बदलाव करना चाहिए.

समस्याओं के समाधान पर केंद्रित हो शोध

डॉ. श्रुति तिवारी ने कहा कि शोध केवल प्रकाशन तक सीमित न रहकर वास्तविक समस्याओं के समाधान पर केंद्रित होना चाहिए. एसीसीए के प्रभांशु मित्तल ने अनुकूलन क्षमता को भविष्य के युवाओं का सबसे जरूरी कौशल बताया. नेहा मुंशी ने निरंतर कौशल विकास और उद्योग आधारित शिक्षा पर जोर दिया. कार्यशाला में एसीसीए के अर्जुन कुकरेजा ने एसीसीए योग्यता कार्यक्रम की जानकारी दी. संचालन रोहन राजवंशी ने किया.

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