न्याय का मिलने का भरोसा ही न्यायपालिका की है सबसे बड़ी ताकत

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने शुक्रवार को जबलपुर स्थित मुख्यपीठ पहुंचकर विधिवत पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कोगजे ने कहा कि न्यायपालिका में लोगों का भरोसा सबसे महत्वपूर्ण है। हमारा प्रयास रहेगा कि न्याय की प्रक्रिया अधिक प्रभावी, सुगम और समयबद्ध बने। बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय से न्याय व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है।

जबलपुर स्थित मुख्यपीठ पहुँचने पर नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश का गरिमामय स्वागत किया गया। न्यायिक अधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और बार पदाधिकारियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होने शुक्रवार को मप्र हाई कोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। इससे पहले वे गुजरात हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दे रहे थे। भोपाल के लोक भवन स्थित सांदीपनि सभागार में राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने गत दिवस उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। एडिशनल सालिसिटर जनरल सुनील जैन, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, हाई कोर्ट बार अध्यक्ष मृगेन्द्र सिंह व हाई कोर्ट एडवोकेट्स बार अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने मुख्य न्यायाधीश के व्यक्तित्व-कृतित्व रेखांकित किया।

गार्ड ऑफ ऑनर से स्वागत

जबलपुर मुख्य पीठ पहुंचने पर मुख्य न्यायाधीश को गॉर्ड ऑफ ऑनर देकर उनका स्वागत किया गया। इसके बाद कोर्ट रूम नंबर-एक में आयोजित औपचारिक स्वागत समारोह में हाई कोर्ट के न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों ने उनका अभिनंदन किया। स्वागत समारोह में मुख्य न्यायाधीश ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी न्यायिक संस्था की मजबूती उसके सभी अंगों के सामूहिक प्रयास से होती है। उन्होंने बार और बेंच के बीच संवाद और सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि न्यायिक व्यवस्था में अधिवक्ताओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। न्यायपालिका का अंतिम उद्देश्य आम नागरिक को न्याय उपलब्ध कराना है और इसके लिए सभी को अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभानी होगी।

स्वागत समारोह के बाद न्यायमूर्ति कोगजे ने मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपना पदभार ग्रहण किया। इसके साथ ही हाई कोर्ट की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था की औपचारिक कमान उनके हाथों में आ गई। उनका कार्यकाल न्यायिक सुधार, लंबित प्रकरणों के निस्तारण और न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायमूर्ति कोगजे का न्यायिक और विधिक अनुभव करीब तीन दशक का है। उन्होंने 1993 में वकालत शुरू की थी। गुजरात में सरकारी अधिवक्ता और विशेष लोक अभियोजक के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारियां संभालीं। 2002 के गोधरा दंगा मामलों से जुड़े प्रकरणों में भी वे विशेष लोक अभियोजक रहे। अप्रैल 2016 में गुजरात हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और मार्च 2018 में स्थायी न्यायाधीश बने। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनके सामने जबलपुर मुख्य पीठ के साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों के न्यायिक एवं प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी होगी।

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