

नई दिल्ली। प्रस्तावित ‘सीड बिल’ को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कृषि भवन में देशभर के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक चर्चा की। उन्होंने कहा कि 1966 का मौजूदा बीज अधिनियम अब बदलती कृषि व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। करीब 70% बीज इसके दायरे से बाहर हैं और नकली व घटिया बीजों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए नया कानून जरूरी है।
शिवराज ने कहा कि 2025 में प्रस्तावित विधेयक पर करीब 18,000 सुझाव मिले थे। आज करीब 20 किसान संगठनों ने अपने सुझाव दिए और यह परामर्श प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून बनाने में जल्दबाजी नहीं होगी और किसानों के हित में मिले सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसानों के पारंपरिक और कृषक किस्मों के बीजों के उपयोग, आदान-प्रदान और बिक्री के अधिकार सुरक्षित रहेंगे। इनके लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं होगा। प्रस्तावित कानून में प्रभावी दंड व्यवस्था और बीजों की ट्रेसेबिलिटी का प्रावधान भी किया जा रहा है, जिससे किसान सही बीज की पहचान कर सकेंगे।
