सियासत
शाखा विस्तार पर संघ का लगातार फोकस है. इसलिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शाखा नेटवर्क मध्यप्रदेश में और मजबूत हुआ है. सूत्रों के अनुसार हाल ही में मध्य क्षेत्र इकाई की एक बैठक में क्षेत्र कार्यवाह यशंवत इंदापुरकर ने यह रिपोर्टिंग की. इस रिपोर्टिंग के अनुसार 2024 में मध्य प्रदेश के तीनों प्रांतों महाकौशल, मध्य भारत और मालवा प्रांत में शाखाओं की संख्या 3282 तक बढ़ गई हैं. मध्यप्रदेश में पहले 5646 शाखाएं लगती थी अब यह संख्या 8923 हो गई हैं. शाखाओं का नेटवर्क सबसे अधिक मालवा प्रांत में हैं. मालवा प्रांत में इस समय 3978 शाखाएं लग रही हैं. 2020 में यह संख्या 3259 थी. पिछले वर्ष विजयादशमी में मालवा प्रांत में 5866 ग्रामों से एक लाख 15 हजार स्वयंसेवक पथ संचलन में निकले थे.
इनमें 708 नगरीय बस्तियों के 71000 स्वयंसेवक भी शामिल हैं. इस तरह से कुल मिलाकर 185,000 स्वयंसेवक पथ संचलनों में शामिल हुए. संघ ने 2025 के अपने शताब्दी समारोह के लिए शताब्दी विस्तारक निकाले हैं. देश भर में 13 सौ शताब्दी विस्तारक निकले हैं. इनमें मध्य प्रदेश से 215 शताब्दी विस्तारक निकले हैं जो लगातार एक वर्ष तक पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में संघ का नेटवर्क मजबूत करेंगे. इनमें सबसे अधिक मध्य भारत प्रांत से 110 शताब्दी विस्तारक निकले हैं. इसके अलावा महाकौशल से 48 और मालवा प्रांत से 57 शताब्दी विस्तारक निकले हैं. शाखाओं की संख्या के अलावा साप्ताहिक मिलन, मासिक संपर्क योजना और संग मंडल योजना अलग से हैं.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मध्य प्रदेश में इस समय प्रदेश की 18000 ग्राम पंचायतों में सीधा संपर्क है. यानी इन ग्राम पंचायतों में किसी न किसी तरीके से संघ का कार्य चल रहा है जबकि 80 फ़ीसदी से अधिक शहरी बस्तियों में संघ का काम किसी न किसी रूप में नियमित रूप से चल रहा है. मध्य प्रदेश संघ की दृष्टि से मध्य क्षेत्र इकाई के अंतर्गत आता है जिसमें छत्तीसगढ़, मध्य भारत महाकौशल और मालवा प्रांत आते हैं. संघ की नित्य प्रतिदिन शाखाओं में जाने वाले स्वयंसेवकों की संख्या प्रदेश भर में 3 लाख से अधिक है. जबकि प्रदेश में 70 लाख स्वयंसेवक संघ की किसी ने किसी गतिविधि में वर्ष भर में शामिल होते हैं.
मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेटवर्क के अलावा संघ परिवार के 36 संगठन भी सक्रिय हैं. संघ परिवार की संयुक्त विराट शक्ति भी कांग्रेस के लिए एक चुनौती है क्योंकि संघ कार्य का राजनीतिक रूप से लाभ अंततः भाजपा को मिलता है. संघ की मध्य क्षेत्र इकाई ने तय किया है कि 2025 तक प्रदेश में शाखाओं की संख्या 10,000 तक की जाएंगी. मध्य प्रदेश में संघ विशेष रूप से दलितों और आदिवासियों के बीच अपना नेटवर्क मजबूत कर रहा है. लगातार सामाजिक समरसता अभियान चलाया जा रहा है. आदिवासियों के बीच संघ का डीलिस्टिंग आंदोलन भी खूब लोकप्रिय हुआ है
