
छिंदवाड़ा। किसानों और पशुधन के प्रति कृतज्ञता का पर्व पोला गुरुवार को शहर के पाला ग्राउंड, बरारीपुरा में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सार्वजनिक श्री पोला उत्सव समिति पाला ग्राउंड बरारीपुरा द्वारा आयोजित 16वें पोला पर्व में बड़ी संख्या में किसान, पशुपालक और श्रद्धालु शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा और साज-सज्जा के साथ पहुंचे बैलों ने आयोजन में विशेष आकर्षण बढ़ाया। पर्व की शुरुआत सुबह विधि-विधान से बैलों की पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद सजे-धजे बैलों के साथ चल समारोह निकाला गया। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन के बीच निकले जुलूस में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। बैलों के सींगों और शरीर को रंग-बिरंगे कपड़ों, आभूषणों और पारंपरिक सजावट से सजाया गया था। जगह-जगह लोगों ने बैलों का पूजन कर उन्हें गुड़ और अन्य सामग्री खिलाई। समिति के अनुसार पोला पर्व पशुधन के प्रति सम्मान और किसानों के जीवन में बैलों की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
इसी भावना को ध्यान में रखते हुए आयोजन में ‘पशुधन का पूजन और किसानों का सम्मान सिखाता हैÓ का संदेश दिया गया। आयोजन के दौरान किसानों और पशुपालकों ने अपनी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उत्साहपूर्वक भागीदारी की। शाम करीब चार बजे पाला ग्राउंड में सजे-धजे बैलों के जोड़ों के बीच प्रतियोगिता आयोजित की गई। बेहतर साज-सज्जा वाले बैलों का चयन कर उन्हें पुरस्कार प्रदान किए गए।
परंपरा और आस्था का पर्व है पोला
पोला पर्व किसानों के लिए विशेष महत्व रखता है। खेती-किसानी में बैलों के योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए इस दिन पशुधन की पूजा की जाती है। आयोजन में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोडऩे का संदेश दिया गया।
