नयी दिल्ली, 10 सितंबर (वार्ता) दिल्ली की एक अदालत ने आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े धन-शोधन मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे तेजस्वी यादव और पत्नी राबड़ी देवी के खिलाफ गुरुवार को आरोप तय किए।
राउज एवेन्यू अदालत के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने यह आदेश दिया। अदालत ने आदेश सुनाते हुए कहा, “राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर पद के दुरुपयोग और अपराध से मिली कमाई का इस्तेमाल करने का गंभीर शक है। वे पटना में एक विवादित जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो उन्हें लालू प्रसाद यादव के कहने पर 2005 और 2014 के बीच स्थानांतरित की गयी थी, जब वे केंद्रीय रेल मंत्री थे।”
अदालत ने कहा कि संकेत मिले हैं कि तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद के कार्यकाल में रांची और पुरी में होटलों को पट्टा पर देने के लिए रेलवे अधिकारियों ने टेंडर में हेरफेर किया था। इन होटलों के निदेशकों ने पटना में एक जमीन लालू की करीबी सहयोगी सरला गुप्ता को स्थानांतरित की, जिन्होंने बाद में ये शेयर बहुत कम कीमत पर राबड़ी देवी को स्थानांतरित कर दिये।
अदालत ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कुल नौ लोगों के खिलाफ धन-शोधन के आरोप तय किये। सात अन्य लोगों को आरोपमुक्त कर दिया गया। इस मामले में आरोपियों में मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, सरला गुप्ता, प्रेमचंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल काकरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, मेसर्स सुजाता होटल्स, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलन और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में न्यायाधीश ने केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भ्रष्टाचार मामले में यादव परिवार-राबड़ी देवी और 11 अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय किए थे, जो घोटाले से जुड़ा था। धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय किये गये थे। आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम भी लागू किया गया है। भ्रष्टाचार के सिलसिले में अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, विजय कोचर, विनय कोचर, सरला गुप्ता और प्रेमचंद गुप्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप तय किये जायें।
