
देवास। सीमित संसाधन, छोटा सा ग्रामीण स्कूल और बड़ा संकल्प… इसी संकल्प ने बागली विकासखंड के माध्यमिक विद्यालय झिकड़ाखेड़ा को देशभर में पहचान दिला दी। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए गए लगातार प्रयासों का ऐसा परिणाम सामने आया कि स्कूल ने स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग 2025-26 में मध्यप्रदेश में पहला और राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल कर लिया। करीब 1.69 लाख विद्यालयों की सहभागिता वाली इस प्रतिस्पर्धा में झिकड़ाखेड़ा की उपलब्धि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था के लिए भी मिसाल बन गई है।
2017 में जिला स्तर से शुरू हुआ सफर, अब देश तक पहुंची पहचान-
झिकड़ाखेड़ा स्कूल का भवन वर्ष 2008-09 में बना था। वर्ष 2017 में विद्यालय को जिला स्तर पर स्वच्छता के लिए द्वितीय पुरस्कार मिला। इसके बाद स्कूल ने इसे महज पुरस्कार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि स्वच्छता और हरियाली को अपनी नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बना लिया। दिसंबर में हर साल स्वच्छता पखवाड़ा आयोजित किया जाता है। स्कूल परिसर में डिस्पोजल और प्लास्टिक के उपयोग पर रोक है।
स्कूल परिसर में जगह नहीं तो निकाला दूसरा रास्ता-
परिसर में पौधारोपण के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने के बावजूद स्कूल ने इसका रास्ता निकाल लिया। शिक्षक विद्यार्थियों के साथ आसपास के खाली स्थानों पर पौधे लगा रहे हैं। बच्चों को भी अपने घर और आसपास उपलब्ध खाली जगहों पर पौधारोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। खास बात यह है कि पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल की भी मॉनिटरिंग की जाती है, ताकि पौधे सिर्फ अभियान का हिस्सा बनकर न रह जाएं, बल्कि समय के साथ पेड़ बनें।
सफाई से आगे बढ़कर पानी-बिजली बचाने पर भी जोर-
विद्यालय की पहल केवल साफ-सफाई और पौधारोपण तक सीमित नहीं है। बच्चों को बिजली और पानी की बचत, पर्यावरण संरक्षण तथा सिंगल यूज प्लास्टिक से दूरी के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। स्कूल में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर भी काम किया गया है। हरित परिसर और संसाधनों के बेहतर उपयोग को स्कूल की दिनचर्या में शामिल किया गया है।
सफाई के साथ पढ़ाई में भी डिजिटल कदम-
विद्यालय ने तकनीक के इस्तेमाल में भी पीछे रहने के बजाय समय के साथ कदम मिलाया है। प्रधान अध्यापक विष्णु जाधव के अनुसार, स्कूल में वर्ष 2017 से ही डिजिटल माध्यम से पढ़ाई शुरू कर दी गई थी। वर्तमान में यहां तीन स्मार्ट टेलीविजन हैं, जिनके माध्यम से विषयवार इंटरनेट आधारित सामग्री से विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है। इससे कठिन विषयों को भी बच्चों के लिए सरल और रोचक तरीके से समझाने में मदद मिल रही है।
1.69 लाख स्कूलों में से 191 तक पहुंची होड़-
स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग के लिए स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के माध्यम से पंजीयन किया गया। देशभर में करीब 1 लाख 69 हजार विद्यालयों ने सहभागिता की, जिनमें से 191 विद्यालयों का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ।मूल्यांकन में पर्यावरण जागरूकता, पौधारोपण, स्वच्छ परिसर, सुरक्षित पेयजल, शौचालय, हाथ धुलाई, ऊर्जा दक्षता, वर्षा जल संचयन, भवन रखरखाव और कचरा-अपशिष्ट प्रबंधन सहित कई मानकों को शामिल किया गया। इन्हीं कसौटियों पर झिकड़ाखेड़ा मावि ने ग्रामीण क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया।
संसाधन कम, विद्यार्थियों की संकल्प शक्ति ज्यादा-
प्रधान अध्यापक विष्णु जाधव कहते हैं, हमारे पास संसाधन अधिक नहीं हैं, लेकिन हमारे विद्यार्थियों की संकल्प शक्ति अधिक है। बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, पानी-बिजली की बचत, सिंगल यूज प्लास्टिक से दूरी और पौधारोपण के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। इसका असर अब स्कूल की सीमाओं से बाहर भी दिखाई देने लगा है।
सांसद ने कहा- ईमानदार प्रयास हो तो गांव का स्कूल भी देश में नाम कमा सकता है-
विद्यालय की इस उपलब्धि पर गत दिवस सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल और भाजपा नेता सुनील पुरोहित ने प्रधान अध्यापक विष्णु जाधव के प्रयासों की सराहना की। सांसद ने कहा कि झिकड़ाखेड़ा स्कूल दूसरे विद्यालयों के लिए प्रेरणा बना हुआ है। ग्रामीण परिवेश में सीमित संसाधनों के बावजूद यदि ईमानदारी और निरंतरता के साथ प्रयास किए जाएं तो गांव का स्कूल भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।
