जबलपुर: सडक़ सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे, सुरक्षा के नाम पर हर साल बनाए जाने वाले नियम, चौराहों पर लगे कैमरे, चौराहों पर लगीं चमचमाती लाइटें और पुलिस, आरटीओ की चालानी कार्रवाई … खूनी सडक़ोंं के सामने सब बेअसर साबित हो रही है। हकीकत में तमाम दावे जबलपुर की खूनी सडक़ोंं पर दम तोड़ रहे हैं। दरअसल सडक़ों पर यमदूत बनकर दौड़ रहे डंपरों, बसों और बेलगाम वाहनों पर लगाम कसने में सरकारी तंत्र पंगु साबित हो रहा है। शहर सडक़ों पर सरपट दौड़ रहे वाहनों की अंधी रफ्तार जिंदगी छीन रही है। हर दिन बेलगाम रफ्तार से सडक़ें खून से लाल हो रही है।
वर्ष 2023, 24, 25, 26 तक दर्ज आंकड़े इतने खौफनाक है कि इसे देखकर हर किसी की रूह कांप जाए। इन वर्षों में जनवरी से लेकर जून तक अगर तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाएं तो 8,347 सडक़ हादसे हुए। रफ्तार के कहर ने 1304 की जिंदगी लील ली। जबकि 9,960 घायल हुए। बीते सालों की तुलना में सडक़ दुर्घटनाओं की संख्या में भले ही कमी आई है लेकिन मौतों का आंकड़ा चिंताजनक है। सवाल यह है कि क्या ये मौतों का आंकड़ा कम है? क्या जिम्मेदार इन परिवारों की तबाही को सुधार कहकर पल्ला झाड़ सकते है? मौतेंं, घायलों की संख्या चीख-चीख कर कह रही है कि सडक़ोंं पर मौत बनकर दौड़ते वाहनों पर लगाम कसने में वे नाकाम साबित हो रहे है। दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों का ग्राफ चिंता पैदा करता है बल्कि गवाही दे रहा है कि सडक़ों पर लापरवाही खत्म नहीं हो रही है।
तब तक यूं ही सडक़ें होती रही रहेगी लाल
शहर के ब्लैक स्पॉट्स और सडक़ों के इंजीनियरिंग फॉल्ट को सालों बाद भी नहीं सुधार पाते है और यूं ही ब्लेक स्पॉट्स पर हादसे होते रहते है। खटारा और बिना फिटनेस दौड़ रहे भारी वाहनों को सडक़ों पर दौड़ाया जाता है। अधिकतर लोग हेलमेट, सीटबेल्ट नहीं लगाते। गति सीमा के नियमों का पालन नहीं करते। जिम्मेदार बेलगाम रफ्तार पर लगाम नहीं कस पा रहे है, ब्लैक स्पॉट्स को पूरी तरह दुरुस्त नहीं कर पा रहे है आवारा मवेशी और नाबालिगों के हाथों में थमी तेज रफ्तार गाडिय़ों पर शिकंजा नही कसा जा रहा है।
जब तक इन बातों पर सुधार नहीं होता तब तक सडक़़ें यूं ही लाल होती रहेंगी। केवल चालान रसीदें काटने से सडक़ों पर बहता खून नहीं रुकेगा। हादसों का शराब पीकर वाहन चलाने वाले भी सबसे बड़ा कारण बने हुए है। वे खुद और दूसरों की जान के लिए खतरा है । लोग भी लापरवाही बरतते है। यातायात नियमों को तोडऩे के साथ मोबाइल पर बात करते हुए बिना हेल्मेट, सीट बेल्ट के वाहन चलाते है। जबकि सब को पता होता है कि वाहन चलाते समय यदि सही तरीके से यातायात नियमों का पालन किया जाये तो 50 प्रतिशत दुर्घटनाओं में जान गंवाने से टाला जा सकता है।
इनका कहना है
नागरिक सडक़ यातायात के नियमों का पालन करें । वे वाहन चलाते समय गति सीमा का ध्यान रखें और हेलमेट व सीट बेल्ट जैसे अनिवार्य सुरक्षा नियमों का पालन करें। आपकी एक छोटी सी लापरवाही पूरे परिवार को उम्र भर का दर्द दे सकती है। युवा पीढ़ी से भी अपील है कि वह नियमों का पालन करें ताकि जीवन सुरक्षित रहें।
अखिलेश तिवारी, एएसपी, यातायात
माह- कुल दुर्घटनाएं
2023- 2024- 2025- 2026
जनवरी- 502 – 489 – 323 -363
फरवरी- 366 – 447 – 306 -311
मार्च- 384 – 406 – 353 – 288
अप्रैल- 269 – 352- 287 – 298
मई- 327 – 432- 271 – 313
जून- 348 – 340- 242- 330
योग- 2,196 – 2,466- 1782 – 1,903
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मृतक
2023-2024-2025-2026
63-56-54-47
41-41-68-64
44-48- 79-43
50-40-66-53
57-53-55-56
36 – 69 – 60-61
योग- 291- 307 – 382- 324
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घायल
2023-2024-2025-2026
568-584-388-427
421- 562- 405-352
449- 516- 474- 312
284- 435- 363- 301
350- 565- 292- 418
394- 384- 287- 429
योग- 2,466- 3,046 – 2,209 – 2,239
